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एमएसएमई द्वारा आगरा में एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, आगरा : भारत सरकार, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय एमएसएमई विकास कार्यालय आगरा द्वारा सेठ पदम चंद जैन प्रबन्धन संस्थान में एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अपने विचार रखते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनूप कुमार सहायक कुलसचिव, डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा ने युवाओं को अपनी पढाई पूर्ण कर एमएसएमई मंत्रालय की योजनाओं की सहायता से नौकरी प्रदान करने वाले उद्यमी बनने का आहृवान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नौकरियों की सीमित संख्या को देखते हुए विद्यार्थियों को नौकरी के स्थान पर अपने उद्यम लगाने पर अधिक प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्रजेश कुमार यादव आई.ई.डी.एस. उपनिदेशक ने एमएसएमई की परिभाषा एवं उद्यमी के धैर्य, मेहनत, गुणवत्तापूर्वक कार्य एवं व्यवसाय में समय से अपनी प्रतिबद्धताओं को पूर्ण करने के महत्व के बारे में उदाहरण पूर्वक वर्णन किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. मुकेश शर्मा, आई.ई.एस.एमएसएमई विकास कार्यालय-आगरा ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना एक जनपद एक उत्पाद योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित अन्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

तकनीकी सत्र को सम्बोधित करते हुए प्रो.सीमा सिंह ने उद्यमी, उद्यमिता एवं उद्यम विषयक महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की एवं स्थानीय एवं अन्य प्रसिद्ध उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत किये। जिसमें लिज्जत पापड, जोमेटों और ओयो होटल जैसे सफल उद्यमियों का उदाहरण शामिल है। महिला सशक्तिकरण में पबीवेन रावडी के एम्ब्रोयिड्री के क्षेत्र में तथा आगरा की रंजना यादव जिन्होंने अपने घर में मोती की फलस उगाई का उदाहरण दिया। इसके अतिरिक्त एक सफल उद्यमी बनने के लिये आवश्यक विषयों के बारे में प्रकाश डाला।

डॉ. श्वेता चैधरी ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में उद्यमिता के इतिहास का वर्णन किया उन्होंने कहा कि कोई नया व्यवसाय लगाना और लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना उद्यम कहलाता है। भारत के व्यवसाय का इतिहास हडप्पा सभ्यता में भी इंगित है। मुगल काल एवं ईस्ट इण्डिया कम्पनी के समय में कुछ क्षेत्रों में उद्यमिता को नुकसान हुआ तथा कुछ क्षेत्रों में फायदा हुआ। भारत की पहली काॅटन मिल वर्ष 1854 में एक भारतीय उद्यमी ने स्थापित की थी। कार्यक्रम संचालक डॉ. मुकेश शर्मा ने तथा प्रो. ब्रजेश रावत, निदेशक सेठ पदम चन्द जैन प्रबन्धन संस्थान ने तकनीकी सत्र में होने वाले सत्रों को ध्यानपूर्वक ग्रहण करने का अनुरोध किया तथा एमएसएमई का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रतिभागी विद्यार्थियों के अतिरिक्त डॉ. स्वाती माथुर, डॉ. रूचिरा प्रसाद, सुश्री जाग्रती असीजा, डॉ. श्वेता गुप्ता, श्री सुनील कुमार पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।

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