दिल्ली: राजधानी दिल्ली में नवजात को लावारिस की तरफ से फेंकने के मामले बढ़ते जा रहे हैं. पूर्वी जिले में ही पांच दिनों में दूसरी घटना सामने आई है, जहां जन्म के कुछ घंटे के बाद ही नवजात को डलावघर के पास फेंक दिया गया. गनीमत रही कि डलावघर के आसपास घूमते मवेशियों से पहले इंसान की नजर मासूम पर पड़ गई और पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचा दिया. गाजीपुर के बाद दूसरा मामला प्रीत विहार में सामने आया है. यहां राधू पैलेस के पास बने डलावघर में एक बाल्टी में नवजात को फेंका गया. डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे का वजन 2.4 किलो है. फिलहाल उसकी हालत स्थिर है लेकिन उसे 48 घंटे तक निगरानी में नर्सरी में रखा जाएगा.
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे राधू पैलेस के डलावघर पर कूड़ा बीनने वाले समीर नामक युवक ने एक बाल्टी देखी. बाल्टी में एक कपड़े का बैग था. समीर बैग निकालकर बाल्टी ले जाने लगे तो उसे किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. बैग की चेन खोलकर देखा तो उसमें नवजात शिशु था. यह देखकर आसपास मौजूद लोगों में कौतूहल मच गया. इसी दौरान सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई. यहां खड़ी एक महिला की गोद में बच्चे को डालकर पुलिस उसे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले गई. नवजात के नाल से खून निकल रहा था. डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद बताया कि शिशु पूरे नौ महीने गर्भ में रहा है. उन्होंने एक दिन पहले घर में ही बच्चे के जन्म की संभावना जताई. उधर, पुलिस ने बच्चे को फेंकने के बारे में पता लगाने के लिए कुछ चश्मदीदों से पूछताछ की है. इसमें पता चला है कि एक महिला रिक्शे से यहां पर आई थी, उसने बाल्टी को डलावघर में रखा और रिक्शे पर बैठकर चली गई. इससे पहले रविवार को गाजीपुर के पेपर मार्केट में डलावघर के पास से नवजात मिला था. इस बच्चे के माता-पिता का अभी तक पता नहीं चल सका है. पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के मामलों में हमारी पहली प्राथमिकता नवजात की जिंदगी बचाना है. साथ ही पुलिस उनका पता लगाने में भी जुटी है जो नवजातों को इस तरह फेंक रहे हैं.
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