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राज्य सूचना आयुक्त नरेन्द्र श्रीवास्तव की बड़ी कार्यवाही, अपीलकर्ता की सभी फाईलें हुई निस्तारित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : राज्य सूचना आयुक्त नरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने अपीलकर्ता अमर बहादुर सहगल पुत्र हरमल सिंह ग्राम पंचायत इस्लामनगर जनपद- सहारनपुर बनाम जिला पंचायत राज, सहारनपुर के अन्तर्गत आने वाले सभी (887) ग्राम पंचायतों से सम्बन्धित कुल 18 आरटीआई अपीलों की सम्मिलित सुनवाई करते हुए आज उ0प्र0 सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 एवं उ0प्र0 सूचना का अधिकार नियमावली-2015 तथा माननीय उच्चतम न्यायालय (सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेन्डरी एजुकेशन एवं अदर्स बनाम आदित्य बन्धोपाध्याय) के मद्देनजर सभी अपीलों को किया निस्तारित।
सूचना आयुक्त ने अपने निर्णय में कहा कि अपीलकर्ता के मांगी गयी सूचनाओं का प्रारूप पत्र है तथा उनके द्वारा मांगी गयी सूचनाएं काफी विस्तृत है। अपीलकर्ता द्वारा उपरोक्त पत्रावलियों में उपलब्ध अधिनियम की धारा 6 (1) के द्वारा मांगी गयी सूचना न तो व्यापक जनहित में है, न ही अधिनियम में अपेक्षित सूचना की पारदर्शिता को बढ़ाने, भ्रष्टाचार को रोकने अथवा सरकारों के परिकरणों को शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने में सहायक हैं। मांगी गयी सूचनाएं यांत्रिक ढंग से मांगी गयी हैं। निश्चय ही लोक प्राधिकारी के सीमित संसाधन अपीलकर्ता द्वारा चाही गयी सतही सूचनाओं पर व्यर्थ नहीं किया जा सकता है।
अपीलकर्ता अमर बहादुर सहगल पुत्र हरमल सिंह ग्राम पंचायत इस्लामनगर जनपद- सहारनपुर के मूल आवेदन-पत्र धारा-6 (1) के सम्मिलित परिशीलन से स्पष्ट है कि अपीलकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम -2005 के तहत जिला पंचायत राज अधिकारी, सहारनपुर के अन्तर्गत आने वाले (887) ग्राम पंचायतों एवं विकास खण्ड नकुड, एवं गंगोह तथा सरसवा के अन्तर्गत आने वाले क्रमशः (85) एवं (97) ग्राम पंचायतों के कार्यो से सम्बन्धित सूचनाएं, जिनमें ग्राम पंचायत/ग्राम सभा की बैठक, अवर अभियन्ता, लघु सिचंाई द्वारा तैयार किये गये प्रॉकलन, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति, सामग्री खरीद बिलों, मास्टर रोल, मजदूरों का नाम पता व खाता संख्या जिससे मजदूरों को पी0एम0एम0एस0 द्वारा भुगतान किया गया, कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र, कोष वही व स्टेटमेंट अकाउन्ट, हैंड पम्प मरम्मर व रिबोर किये गये हैंड पम्पों की सूची, भुगतान किये गये बिलों, किस फर्म/वेन्डर/मजदूरो को कितना भुगतान किया गया, उनके खाता संख्या वैन्डर बनाने हेतु उनका आवेदन पत्र पैन कार्ड एवं जी0एस0टी0 नम्बर, मेकर सचिव व चैकर प्रधान/ प्रशासन के द्वारा हस्ताक्षर युक्त अभिलेखों, भुगतान के बिल बाउचर, पी0एफ0एम0एक द्वारा भुगतान की प्रति, कार्य के आरम्भ-मध्य एवं पूर्ण होने तीनो स्टेज की फोटो प्रतिया, प्रॉकलन, ग्राम पंचायत / ग्राम सभा का प्रस्ताव, प्रशासनिक/वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति, डोंगल बनवाने की प्रक्रिया सम्बन्धित अभिलेख, एन0आई0सी, सहारनपुर को डांेगल एक्टीवेट करने हेतु भेजे गये पत्र की प्रति, डोंगल का प्रयोग कर कितनी धनराशि का भुगतान किया गया तथा ग्राम पंचायत से सम्बन्धित की जार्च/अभिलेख प्रतिस्थानी सचिव को प्राप्त कराते समय तैयार की गयी जार्च सूची, किस दिनांक को दिया गया, सचिव के निलम्बन सम्बन्धी अभिलेख, बहाली सम्बन्धी अभिलेखों, विवरणों की प्रतियां, आरोप पत्रों की प्रतियां, जांच अधिकारी का नाम/स्पष्टीकरण, कितनी धनराशि का दुरूपयोग किया गया, आदि से सम्बन्धित बिन्दुओं की सूचनाएं कुल 18 आवेदन पत्रों के माध्यम से चाही गयी थी।
राज्य सूचना आयुक्त नरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आयोग का मत है कि जहां एक ओर अधिनियम के अन्तर्गत नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में पत्रावलियोें में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सूचना प्राप्त करने का अधिकार है, वही दूसरी ओर यह भी आवश्यक है कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि अधिनियम का दुरूपयोग करते हुए, इतनी विस्तृत सूचनाएं न मांगी जाये, जिससे कार्यालय का शासकी कार्य अवरूद्ध हो जाये। मांगी गयी सूचनाएं अत्यधिक विस्तृत है, जिसे एकत्र करने में विभाग के सामान्य कार्य प्रभावित होते तथा अपीलकर्ता द्वारा मांगी गयी अधिकांश सूचनाएं वेबसाईट पर उपलब्ध भी र हती है, फिर भी सूचनाओं की प्रमाणित फोटोकाफी मांगी जाती है, अपीलकर्ता द्वारा अनेक वर्षो की तथा सभी विकास कार्योे की सूचना मांगी गयी है, जिससे जन सूचनाधिकारियों के कार्य को और भी कठिन बना दिया जाता है। सूचना के अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों में स्पष्ट रूप से अंकित हैः ’’ भारत के संविधान ने लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की है” और लोकतंत्र शिक्षित नागरिक वर्ग तथा ऐसी सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है, जो उसके कार्यकरण तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी और सरकारों तथा उनके परिकरणों को शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है, और वास्तविक व्यवहार में सूचना के प्रकटन से संभवतः अन्य लोक हितों, जिनके अंतर्गत सरकारों के दक्ष प्रचालन, सीमित राज्य वित्तीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और संवेदनशील सूचना की गोपनीयता को बनाए रखना भी है, के साथ विरोध हो सकता है और लोकतंत्रात्मक आदर्श की प्रभुता को बनाए रखते हुए इन विरोधी हितों के बीच सामांजस्य बनाना आवश्यक है। अतः, अब यह समीचीन है कि ऐसे नागरिकों को, कतिपय सूचना देने के लिए, जो उसे पाने के इच्छुक हैं, उपबंध किया जाए।

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