बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन को सरस्वती की पूजा का दिन भी कहा जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, माघ मास की पंचमी को विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या और ज्ञान में वृद्धि होती है। इसी दिन बसंत पंचमी को मां सरस्वती का जन्म हुआ था। वहीं शास्त्रों के मुताबिक, सरस्वती पूजा के दिन वासना के देवता कामदेव की भी पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति धरती पर आते हैं और प्रकृति में प्रेम रस का संचार करते हैं। इसलिए इस दिन को बसंत पंचमी कहा गया।
बसंत पंचमी पर होती है मां सरस्वती की पूजा
मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या और ज्ञान में वृद्धि होती है। इसी दिन बसंत पंचमी को मां सरस्वती का जन्म हुआ था। वहीं शास्त्रों के मुताबिक, सरस्वती पूजा के दिन वासना के देवता कामदेव की भी पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति धरती पर आते हैं और प्रकृति में प्रेम रस का संचार करते हैं। इसलिए इस दिन को बसंत पंचमी कहा गया।
बसंत पंचमी पर महत्व
इस दिन सिर्फ मां सरस्वती की पूजा ही नहीं बल्कि किसान के लिए भी महत्व रखता है। इस दिन खेतों में फसल लहराई जाती है। इसके अलावा इस दिन पवित्र नदियों में स्नान भी किया जात है। जिसे हम बसंत मेला कहते हैं। इस बार प्रयागराज में कुंभ मेला लगा हुआ है। इस बार बसंत पंचमी की शुरुवात 9 फरवरी दोपहर से होगी जो अगले दिन 10 फरवरी 2 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। लेकिन सभी लोग 10 फरवरी को ही इस त्योहार को मनाएंगे। यह मुहूर्त पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
बसंत पंचमी पूजा विधि
शास्त्रों के मुताबिक, पूर्वाह्न से पहले सरस्वती पूजन (बसंत पंचमी) की पूजा करना का नियम बताया गया है। देवी सरस्वती ज्ञान और आत्मिक शांति की प्रतीक हैं। इसलिए उनकी पूजा करने के दौरान हर भक्त को उन्हें प्रसन्नता के लिए पूजा में सफेद और पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा मां सरस्वती को प्रसाद स्वरूप बूंदी, बेर, चूरमा, चावलका खीर का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। कहते हैं कि मां को गुलाब अर्पित करना चाहिए और टीका भी गुलाल वाला ही लगाना चाहिए।
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