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अयोध्या विवाद के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर भी याचिका

अशाेेेक यादव, लखनऊ। कई महीनों से चल रही अयोध्या विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद को लेकर भी याचिका दाखिल की गई है। याचिका में काशी और मथुरा विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई को फिर से शुरू करने की मांग की गई है।

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्टएक्ट 1991 यानि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को चुनौती दी गई है। हिंदू पुजारियों के संगठन विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ ने इस एक्ट के प्रावधान को चुनौती दी है। इस एक्ट में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में भी उसी का रहेगा।

बताया जाता है कि नरसिम्हा राव की सरकार ने साल 1991 में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट, 1991 बनाया था। जिससे धार्मिक विवाद के चलते किया तरह से धार्मिक स्थल पर पाबंदियां ना लगाई जाए।

यह एक्ट 1991 यानि पूजा स्थल अधिनियम बाबरी विध्वंस से एक साल पहले बनाया गया था। इस एक्ट में कहा गया है कि धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था भविष्य में भी उसी का रहेगा।

हालाकिं अयोध्या विवाद को बाहर रखा गया था, लेकिन इस एक्ट से काशी और मथुरा जैसे कई धार्मिक स्थल के विवाद को खत्म भी किया है।

वहीं, 9 नवंबर 2019 में राम मंदिर पर फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट की बेंच में तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने अपने फैसले में देश के सेक्युलर चरित्र की बात की थी।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र किया है। इस मतलब ये हुआ कि काशी और मथुरा में जो मौजूदा स्थिति है वही बनी रहेगी। उनको लेकर किसी तरह का दावा नहीं किया जा सकेगा।

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