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कोरोना वायरस दबे पांव बढ़ा रहा शुगर का लेवल

कोरोना वायरस ने डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। डायबिटीज के पुराने मरीजों में शुगर लेवल तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही डायबिटीज के बॉर्डर लाइन वाले मरीज अब जद में आ गए हैं। नए मरीजों की संख्या में भी उछाल आया है।

पूर्वी यूपी में पिछले आठ महीने से कोरोना का कहर बरप रहा है। जिले में 26 अप्रैल को पहला मरीज मिला। तब से अब तक 20 हजार संक्रमितों की पहचान हो चुकी है। इनमें से 16 हजार से अधिक संक्रमित एसिंप्टोमेटिक रहे हैं। इस बीच जिले में हुए सीरो सर्वे में भी 21 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली है। माना जा रहा है कि हर पांचवां जनपदवासी वायरस की संक्रमण की जद में आ चुका है। अभी भी संक्रमित रोजाना मिल रहे हैं।

फिजीशियन डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण डायबिटीज हो रहा है। इससे संक्रमितों में शुगर लेवल तेजी से बढ़ा है। जिन मरीजों में डायबिटीज की हिस्ट्री नहीं थी, उनका भी शुगर लेवल बढ़ गया। वह डायबिटीज की जद में आ गए। कोरोना के कारण 85 फीसदी लोगों में लक्षण नहीं आए, लेकिन वायरस उनके शरीर में मौजूद रहा। ऐसे लोगों में भी शुगर लेवल असंतुलित हुआ है।

फिजीशियन डॉ.गौरव पांडेय ने बताया कि सर्दी के मौसम में शुगर लेवल में आंशिक बढ़ोतरी होती है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ जुदा है। कई मरीज हाई लेवल शुगर लेकर ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। पहली बार डायबिटीज की जद में आए मरीजों का भी शुगर लेवल काफी हाई मिला। ओपीडी में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सिंप्टोमेटिक मरीजों में इलाज के दौरान शुगर बढ़ने पर इंसुलिन का डोज लगाना पड़ा था। एसिंप्टोमेटिक मरीजों में शुगर लेवल तेजी से बढ़ा है। इनमें भी कुछ मरीजों को तो इंसुलिन लगाने की जरूरत पड़ी है। इलाज से उन्हें आराम मिला है। समय से इलाज मिलने पर शुगर नियंत्रित हो जाएगा।

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