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“निजता” मौलिक अधिकार है

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आधार मामले में निजता के अधिकार को लेकर अपना महत्वपूर्ण फैसला आज सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश जे एस केहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दे दिया और कहा कि यह जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है या नहीं। संविधान पीठ ने 19 जुलाई से इस मामले पर मैराथन सुनवाई शुरू की थी और तीन अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले में याचिकाकर्ता और मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से बाहर आकर बताया कि कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है और कहा है कि ये अनुच्छेद 21 के तहत आता है। यह फैसला सरकार के लिए तगड़ा झटका है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। अब इस फैसले का सीधा असर आधार कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं के अमल पर होगा।

पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने निजता के अधिकार के मसले को नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के पास स्थानांतरित किया था। इससे पहले 18 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि संविधान के तहत निजता के अधिकार में क्या शामिल है और क्या नहीं? इसलिए इस मामले को नौ सदस्यों वाली संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। एटर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि सूचनात्मक निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के स्तर पर नहीं ले जाया जा सकता। गौरतलब है कि 1954 में आठ न्यायाधीशों और फिर 1962 में छह न्यायाधीशों की पीठ ने यह फैसला सुनाया था कि निजता का अधिकार मूलभूत अधिकार नहीं है। इन्हीं फैसलों के आधार पर सरकार ने मूलभूत अधिकारों के नाम पर आधार कार्ड को चुनौती देनी वाली याचिकाओं का विरोध किया था।

दरअसल मामला ये आया कि आधार कार्ड को तमाम जरूरी सुविधाओं के लिए अनिवार्य किया जाने लगा और निजी हाथों में भी आधार की जानकारी जाने लगी. तब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को सिंगल बेंच से कराने के बजाए 9 सदस्यीय संविधान पीठ से कराने का फैसला लिया. पीठ यह भी तय करेगी कि निजता मौलिक अधिकार है या नहीं? क्या यह संविधान का हिस्सा है? इस फैसले का असर सीधे-सीधे विभिन्न सरकारी योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ने के मामले पर पड़ेगा.

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कुल 21 याचिकाएं दायर की गईं हैं. कोर्ट ने 7 दिनों तक लगातार सुनवाई की थी और इसके बाद 2 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखकर 24 अगस्त की तारीख फैसले के लिए निर्धारित की थी.

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