शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। व्यक्ति के कर्मो के अनुसार शनिदेव अच्छा या बुरा फल देते हैं। जिस किसी की कुंडली में शनि की अशुभ छाया पड़ती है उसे तमाम तरह परेशानियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वहीं अगर शनि की शुभ छाया पड़ने लगे तो व्यक्ति राजा की भांति सुख- सुविधा से संपन्न हो जाता है। शास्त्रों में शनि देव की पूजा करने के कुछ नियम बताए गए है। जिसका पालन जरूर करना चाहिए।
1- शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनकी प्रतिमा या तस्वीर को देखते समय उनकी आंखो में नहीं देखना चाहिए।
2- शनिदेव की पूजा करते समय मंदिर में हनुमानजी के दर्शन और पूजा भी करनी चाहिए।
3- शनि जयंती, शनि अमावस्या या शनिवार के दिन पूजा में ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूर चाहिए।
4- शनि जयंती पर काले तिल और लोहे से बनी चीजों का दान करना चाहिए।
5- शनि देव की पूजा करने से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए।
6- गाय और कुत्तों को भी तेल में बने खाने की चीजें खिलानी चाहिए।
7- सूर्यदेव की पूजा शनि जयंती या अमावस्या के दिन न ही करें तो अच्छा है।
8- शनि जयंती या शनि अमावस्या पर यात्रा को भी स्थगित कर देना चाहिए।
9- शनि जयंती या अमावस्या पर भूलकर भी बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति की आर्थिक तरक्की में रुकावटें पैदा होने लगती है।
10- शनि अमावस्या पर किसी भी महिला का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शनि क्रोधित होते हैं।
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