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वैलेंटाइन डे पर बिगड़ा मौसम का मिजाज, पहाड़ों पर फिर बर्फबारी, बढ़ी ठंड

उत्तराखंड: वैलेंटाइंस डे पर आज तड़के से ही उत्तराखंड के अधिकतर इलाकों में मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। जहां मैदानी इलाकों में बारिश जारी रही तो वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई। इससे राज्यभर में सर्दी एक बार फिर बढ़ गई है। केदारनाथ में तडक़े से बर्फबारी हो रही है। केदारघाटी सहित रुद्रप्रयाग व अन्य स्थानों पर रुक-रुककर बारिश हो रही। इसके साथ ही चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में साढ़े दस बजे के बाद बर्फबारी शुरू हो गई। यहां मैदानी इलाकों में सुबह से बारिश जारी रही।  यमुनोत्री धाम सहित घाटी भी बर्फबारी के आगोश में है। राजधानी देहरादून में सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश होती रही। पर्यटन नगरी धनौल्टी में भी मौसम का मिजाज बदलने से झमाझम बारिश हुई। बारिश ने वैलेंटाइंस डे पर पानी फेर दिया। हर साल वैलेंटाइन डे मनाने बड़ी संख्या में जोड़े यहां पहुंचते हैं।

तापमान में आई गिरावट के कारण धनौल्टी में एक बार फिर से हिमपात हो सकता है। स्थानीय लोगों ने हिमपात होने की संभावना जताई है। श्रीनगर स्थित अलकनंदा घाटी में भी बारिश हुई। घनसाली में हल्की बूंदा बांदी के साथ घुप अंधेरा छा गया और ऊपरी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई। नई टिहरी, पौड़ी, कोटद्वार में बारिश हुई।  इसके साथ ही अधिकतर इलाकों में बादल छाए रहे। प्रदेश के छह जिलों में आज ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार दोपहर से अगले 24 घंटे में देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में ओलावृष्टि और झक्कड़ की चेतावनी जारी की है। वहीं गढ़वाल और कुमाऊं के ऊंचाई वाले स्थानों पर बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। केदारनाथ धाम में मौसम सुधरने के चार दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

धाम अभी भी बर्फ से ढका है। यहां सात फीट से अधिक बर्फ जमी है। 21 जनवरी से पुनर्निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त होने से 23 दिन बाद भी बिजली सप्लाई बहाल नहीं हुई है।  पेयजल लाइनों के बर्फ में दबे होने से पानी की आपूर्ति भी ठप पड़ी है। बुधवार को केदारनाथ में अधिकतम पारा 20 डिग्री व न्यूनतम माइनस 1.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वुड स्टोन के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि धाम में बिजली और पानी की सप्लाई ठप होने से वहां मौजूद 19 लोगों को अपनी जरूरतें पूरी करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ राह है। कार्यस्थलों पर आदमकद से अधिक बर्फ जमी होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। पैदल मार्ग पर भी तीन से पांच डिग्री तक बर्फ मौजूद है, जिससे आवाजाही करना मुश्किल है।

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