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मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम को सौंपा ज्ञापन, ब्रजेश पाठक ने दिया आश्वासन

अशाेक यादव, लखनऊ। उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री ब्रजेश पाठक से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री के सामने स्थायी तौर पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों के बराबर मानदेय करने की मांग रखी है। जिस पर उप मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को समस्या के निदान का आश्वासन दिया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में करीब 100 डीएम व एमसीएच डॉक्टर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यह सभी विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूदा समय में प्रदेश सरकार के आवश्यक सेवा बॉण्ड के तहत 2 वर्ष के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नीट सुपर स्पेशलिटी परीक्षा में उच्च रैंक पाने वाले यह सभी डॉक्टर प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अपनी भागीदारी निभाई हैं, उसके बाद भी इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को स्थायी तौर पर तैनात असिस्टेंट प्रोफसर के समान मानदेय नहीं मिल रहा है,इतना ही नहीं सीनियर रेजिडेंट यानी कि ट्रेनी डॉक्टरों से भी कम मानदेय इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिया जा रहा है। जिसके चलते इन विशेषज्ञ चिकित्सकों में निराशा का भाव पैदा हो रहा।

उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएशन के डॉ.आकाश माथुर ने बताया कि संविदा नियुक्ति के तहत सहायक आचार्य यानी की असिस्टेंट प्रोफेसर रहते हुए स्थाई सहायक आचार्य द्वारा निभाए जा रहे सभी दायित्वों की पूर्ति हम कर रहे है,कोविड-19 की तीसरी लहर में भी हमारे द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की गई है, मौजूदा समय में हमारा मानदेय स्थाई सहायक आचार्य के समतुल्य नहीं है तथा नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस सहित कोई भी भत्ता हमें नहीं मिल रहा है, यहां तक कि हमारे समकक्ष एम्स में कार्यरत सहायक आचार्य से भी हमारा मानदेय बहुत कम है। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनसे अपील की गयी है कि जल्द से जल्द हमारे मानदेय को हमारी नियुक्ति की तिथि से स्थाई सहायक आचार्यों के बराबर किया जाये।

उन्होंने बताया कि हम सभी डीएम व एमसीएच डॉक्टरों को मौजूदा समय में 1,20,000 मानदेय दिया जा रहा है, वह सीनियर रेजिडेंट यानी ट्रेनी डॉक्टर्स को मिलने वाले मानदेय 1,35,000 से भी कम है। जबकि सभी मेडिकल कॉलेजों में अन्य सहायक आचार्यों को मानदेय 2,15,000 मिल रहा है । उन्होंने बताया कि मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर चुनाव से पहले तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से भी मुलाकात कर अपनी मांग रखी गयी थी, आज एक बार फिर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर उन्हें अपना ज्ञापन सौंपा है।

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