लखनऊ। हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या मामले में यूपी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओ.पी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अहम जानकारी दी। डीजीपी ने कहा कि कमलेश तिवारी हत्याकांड में सभी आरोपियों की पहचान हो गई है और 24 घंटे में हत्याकांड का पर्दाफाश हो गया है। जांच में हत्या के तार गुजरात से जुड़े हुए पाए गए। सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से अध्ययन किया गया। जिसमें साफ तौर पर देखा जा रहा है कि एक हत्यारे ने एक विशेष पोशाक पहन कर हत्याकांड को अंजाम दिया। डीजीपी ने कहा कि अभी तक इस घटनाक्रम के पीछे किसी आतंकी संगठन की संलिप्तता अभी तक नहीं मिली है। अभी तक की जांच में तीन लोगों को गुजरात पुलिस के साथ साझा अभियान में हिरासत में लिया गया है। इनमें से एक मोहसिन शेख सलीम है, जो सूरत का रहने वाला है और ये साड़ी की दुकान पर काम करता है।
वहीं दूसरा फैजान है, जो सूरत में ही जिलानी अपार्टमेंट का रहने वाला है। ये 21 साल का है और जूते की दुकान पर काम करता है। डीजीपी के अनुसार मौका ए वारदात से बरामद मिठाई के डिब्बे की खरीद में फैजान लिप्त पाया गया है। वहीं तीसरा शख्स रशीद अहमद पठान हैं। ये 23 साल का है, इसे कंप्यूटर चलाने की जानकारी भी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है, लेकिन उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। उन पर भी नजर रखी जा रही है। ओपी सिंह ने कहा कि हत्याकांड में बिजनौर के दौ मौलानाओं के खिलाफ नामजद मुकदमा भी दर्ज किया गया था। 2015 में दोनों मौलानाओं ने कमलेश के सिर पर इनाम रखा था। इनकी भी जांच की जा रही है। अभी शुरुआती जांच में इन मौलानाओं के ऐलान और सूरत में हिरासत में लिए गए 3 आरोपियों के बीच संबंध खंगाला जा रहा है। ऐसा लगा रहा है कि साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काकर हत्याकांड करवाया गया है।
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