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उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नेपाल बना रहा हेलीपैड, बॉर्डर पर गतिविधियां तेज

अशाेेेक यादव, लखनऊ। नेपाल ने  चीन की सह पर भारतीय सीमा पर गतिविधियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार नेपाल उत्तराखंड के जूलाघाट और दार्चूला में भारतीय सीमा से सटे क्षेत्रों में वह हेलीपैड का निर्माण कर रहा है। नेपाल सेना के जवानों ने भारतीय सीमा पर कांबिंग भी बढ़ा दी है।

उत्तराखंड के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल ने अपने नए नक्शे में दिखाया है। नेपाली संसद इस पर मुहर लगा चुकी है। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला से लगी सीमाओं पर नेपाल ने गतिविधियां तेज कर दी हैं।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय क्षेत्र मालपा के सामने नेपाल ने अपने इलाके में काली नदी के पास एक हेलीपैड तैयार किया है। इसके साथ ही यहां अस्थायी टिन शेड का निर्माण भी किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि नेपाल भारत पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए दार्चुला से तिंकर तक पैदल रास्ते का निर्माण कर रहा है। इस काम में जुटे कर्मचारियों के रहने के लिए अस्थायी टिन शेड बनाए जा रहे हैं।

नेपाल के उच्च हिमालयी इलाकों की ओर माइग्रेशन करने वाले लोग अब तक पूरी तरह भारत पर निर्भर रहे हैं। ये लोग अभी तक धारचूला से होते हुए माइग्रेशन करते आ रहे हैं। अब नेपाल अपने इलाके में पैदल मार्ग बनाकर भारत पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है।

नेपाल में हो रही गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त बढ़ा दी है।

नेपाल ने टनकपुर सीमा पर अस्थायी रूप से स्थापित की गईं सशस्त्र पुलिस की तीन पोस्टों को हटा दिया है। बताया गया कि सशस्त्र पुलिस की ये तीनों पोस्टें कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सीमा सील होने के बाद नेपाल ने अस्थायी रूप से स्थापित कीं थीं।

भारत-नेपाल के बीच चल रही तनातनी के बीच गोरखा जवान छुट्टियां बीच में छोड़कर करके भारत लौट रहे हैं। वहीं प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के नेता बिक्रम चंद ने काठमांडू में नेतृत्व से यह अपील की है कि गोरखा नागरिकों को भारतीय सेना का हिस्सा बनने से रोका जाए।

पार्टी की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि गलवन घाटी में भारतीय जवानों के मारे जाने के बाद भारत और चीन में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने गोरखा रेजिमेंट के नेपाली नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी छुट्टियां रद्द करके ड्यूटी पर वापस आएं। इसका मतलब है कि भारत हमारे नेपाली नागरिकों को चीन के खिलाफ सेना में उतारना चाहता है।

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