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भ्रष्टाचार के खिलाफ मिलकर लड़नी होगी जंग

जया शर्मा

भारत में भ्रष्टाचार चर्चा और आंदोलनों का एक प्रमुख विषय रहा है। स्वतंत्रता के एक दशक बाद से ही संसद में इस पर बहस होती आ रही है और निरंतर जारी है। असल में भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण। ऐसा कार्य जो अपने स्वार्थ सिद्धि की कामना के लिए समाज के नैतिक मूल्यों को ताक पर रख कर किया जाता है, भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार के लिए ज्यादातर हम देश के राजनेताओं को जिम्मेदार मानते हैं पर सच यह है कि देश का आम नागरिक भी भ्रष्टाचार के विभिन्न स्वरूप में भागीदार हैं। वर्तमान में कोई भी क्षेत्र भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है।
अवैध तरीकों से धन अर्जित करना भ्रष्टाचार है, भ्रष्टाचार में व्यक्ति अपने निजी लाभ के लिए देश की संपत्ति का शोषण करता है। यह देश की उन्नति के पथ पर सबसे बड़ा बाधक तत्व है।
भ्रष्टाचार एक ऐसा अनैतिक आचरण है, जिसमें व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं की पूर्ति हेतु देश को संकट में डालने में तनिक भी देर नहीं करता है। देश के भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना भी भ्रष्टाचार का स्वरूप है। भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है।
व्यक्ति का लोभी स्वभाव, लालच और असंतुष्टि एक ऐसा विकार है जो व्यक्ति को बहुत अधिक नीचे गिरने पर विवश कर देता है। व्यक्ति के मस्तिष्क में सदैव अपने धन को बढ़ाने की प्रबल इच्छा उत्पन्न होती है। असल में आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालती है। एक मिलिट्री रिटायर्ड ऑफिसर रिटायरमेंट के बाद भी अपने ट्रेनिंग के दौरान प्राप्त किए अनुशासन को जीवन भर वहन करता है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ गई है।
व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा (इच्छा) भी है। भ्रष्टाचार देश में लगा वह दीमक है जो अंदर ही अंदर देश को खोखला कर रहा है। सरकारी काम करने के लिए कार्यालय में चपरासी से लेकर उच्च अधिकारी तक आपसे पैसे लेते हैं। इस काम के लिए उन्हें सरकार से वेतन प्राप्त होता है वह वहां हमारी मदद के लिए हैं। इसके साथ ही देश के नागरिक भी अपना काम जल्दी कराने के लिए उन्हे पैसे देते हैं अत: यह भ्रष्टाचार है। नागरिकों द्वारा टैक्स भुगतान करने के लिए देश में एक निर्धारित पैमाना तय किया गया है, पर कुछ व्यक्ति सरकार को अपने आय का सही विवरण नहीं देते और टैक्स की चोरी करते हैं। यह भी भ्रष्टाचार है।
कहने को ज्यादातर सेवाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं और इसका मकसद भी यह है कि लोगों को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सके, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं हो पा रहा है। बड़ी समस्या यह है कि घूसखोरी और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के लिए हमारे पास पुख्ता तंत्र का अभाव है। ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता कि ऐसे मामलों की शिकायतें कहां की जाएं। जहां जांच होती भी है, वहां इसकी प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि शिकायतकर्ता को इस तरह का कदम उठाना महंगा पड़ जाता है। सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और काम न रुके, इस डर के मारे लोग भी छोटे-मोटे कामों के लिए घूस देकर पिंड छुड़ाना बेहतर समझते हैं। समाज के अन्य छोटे से बड़े क्षेत्र में भ्रष्टाचार देखा जा सकता है। जैसे राशन में मिलावट, अवैध मकान निर्माण, अस्पताल तथा स्कूल में अत्यधिक फीस आदि। लिहाजा यह कहना गलत नहीं होगा कि समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार देश की उन्नति में सबसे बड़ा बाधक तत्व है। इसकी वजह से गरीब और गरीब होता जा रहा है। भ्रष्टाचार की वजह से ही देश में बेरोजगारी, घूसखोरी, अपराध की मात्रा में दिन-प्रतिदन वृद्धि होती जा रही है। हमारे संविधान के लचीलेपन के वजह से अपराधी में दण्ड का बहुत अधिक भय नहीं रह गया है। अत: भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। कानूनी प्रक्रिया में बहुत अधिक समय नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचारी को बल मिलता है। अत: देश में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने हेतु लोकपाल कानून बनाना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त लोगों में जागरूकता फैला कर, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बना और लोगों का सरकार तथा न्याय व्यवस्था के प्रति मानसिकता में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार रोका जा सकता है। हर प्रकार के भ्रष्टाचार से समाज को बहुत अधिक क्षति पहुंचती है। हम सभी को समाज का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह प्रण लेना चाहिए, न भ्रष्टाचार करें, न करने दें। भ्रष्टाचार एक वैश्विक समस्या बन गया है जिससे लगभग सभी विकासशील देश जूझ रहे हैं। देश से हमारा अस्तित्व है अर्थात देश के बिना हम कुछ नहीं इसलिए अपने देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का हर संभव प्रयास हर देशवासी को करना चाहिए।


(लेखिका प्रमुख शिक्षाविद एवं समाजसेविका हैं)

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