
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। योगी कैबिनेट ने जहां जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी, वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत किया।
कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि योगी सरकार ने भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी एवं बैक डेट में मार्कशीट और डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा–2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया।
इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत योगी सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है। परिसमापन के उपरांत विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे तथा उन्हीं अभिलेखों के आधार पर जेएस विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में निर्गत मार्कशीट एवं डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55(6) के अंतर्गत त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित किए जाने का भी निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि जेएस विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी।
कैबिनेट बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस की स्थापना से संबंधित रहा। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 एवं उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत परिसर दूरस्थ केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
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