
अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार 25 नवंबर को विधि विभाग की ओर से ‘भारतीय संविधान के 75 वर्ष: सामाजिक-आर्थिक न्याय के माध्यम से विकसित भारत का मार्ग-मानचित्र’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुम्बई के कुलपति प्रो. दिलीप उके उपस्थित रहे। मंच पर विशिष्ट अतिथि एवं असम राज्यपाल भवन, गुवाहाटी में राज्यपाल सचिवालय के सलाहकार प्रो. हरबंश दीक्षित, विधि अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा एवं विधि विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. सुदर्शन वर्मा उपस्थित रहीं।

बीबीएयू कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हमें यह सिंहावलोकन करने की आवश्यकता है कि संविधान ने हमें क्या दिया है और हम, भारतीय नागरिक होने के नाते भविष्य में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन किस प्रकार कर सकते हैं।

महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुम्बई के कुलपति प्रो. दिलीप उके ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संविधान राष्ट्र और समाज दोनों के निर्माण की आधारशिला है, जो एक उदार समाज की स्थापना करता है और प्रत्येक नागरिक की पहचान तथा गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

असम राज्यपाल सचिवालय के सलाहकार प्रो. हरबंश दीक्षित ने चर्चा के दौरान कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि हमारे सामूहिक सपनों और आकांक्षाओं का दिव्य दास्तावेज है, जो प्रत्येक नागरिक को अधिकारों के साथ सपने देखने और उन्हें साकार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
डॉ. खुशनुमा बानो द्वारा विधि विभाग की ओर से संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष भर आयोजित कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। साथ ही कुलपति एवं अतिथियों द्वारा संगोष्ठी की पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा द्वारा एडिट की गयी पुस्तक “Transformative Constitutionalism : Issues & Challenges” का भी विमोचन किया गया।
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता आईसीएफएआई लॉ स्कूल, हैदराबाद के डॉ. मुनीश स्वरूप ने की। प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से आये प्रतिभागियों ने विभिन्न उप-विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये।
डॉ. सूफिया अहमद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान प्रो. प्रीति मिश्रा, प्रो. शशि कुमार, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. सूफिया अहमद, डॉ. रेनू पाण्डेय, अन्य शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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