
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : डॉ0 सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ में आयोजित दीक्षांत परेड में मुख्य अतिथि के रूप में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने प्रशिक्षु अधिकारियों और जेल वार्डरों को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं बल्कि यह एक नई यात्रा, नई जिम्मेदारी और नए संकल्प की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि कारागार सेवा को केवल नौकरी नहीं बल्कि एक पवित्र दायित्व समझते हुए प्रशिक्षुओं को ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता के साथ कार्य करना होगा।

मंत्री चौहान ने कहा कि 1940 में स्थापित डॉ0 सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान एशिया का पहला जेल प्रशिक्षण संस्थान है, जिसने अब तक 1,719 अधिकारियों और 13,277 जेल वार्डरों को प्रशिक्षित कर सेवा में योगदान देने का गौरवशाली इतिहास बनाया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस संस्थान से भारत के साथ-साथ नेपाल, तंजानिया और सूडान जैसे देशों के कारागार कर्मी भी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है।

दीक्षांत परेड में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ राज्य के कुल 131 प्रशिक्षु शामिल हुए। इनमें उत्तर प्रदेश राज्य के 08 डिप्टी जेलर, छत्तीसगढ़ राज्य के 03 जेल अधीक्षक तथा 06 सहायक जेल अधीक्षक (120वाँ सत्र) और 114 प्रशिक्षु जेल वार्डर (177वाँ सत्र) सम्मिलित रहे।

निरीक्षण करते हुए कारागार मंत्री ने प्रशिक्षुओं के अनुशासन और प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की अश्विनी पूजा तिर्की (बेस्ट कैडेट अधिकारी संवर्ग) और उत्तराखंड की दिव्या चौहान (बेस्ट कैडेट जेल वार्डर संवर्ग) को महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए सराहना की।
इस अवसर पर महानिदेशक कारागार पी. सी. मीना ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आचरण नियम, नए आपराधिक कानून, जेंडर संवेदीकरण, ई-प्रिजन, मनोविज्ञान, अपराधशास्त्र, समाजशास्त्र और जेल मैनुअल जैसे विषयों पर गहन अध्ययन कराया गया, साथ ही शारीरिक दक्षता और अनुशासन को भी प्राथमिकता दी गई।