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मप्र भाजपा की चौथी सूची में 24 मंत्रियों समेत 57 विधायकों के नाम, सिंधिया खेमे के 4 मंत्री अधर में

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, भोपाल : मप्र में मतदान 17 नवंबर को एक चरण में संपन्न होगा और नतीजों का ऐलान अन्य चार राज्यों के साथ 3 दिसंबर को किया जाएगा. मध्य प्रदेश में चुनावी तारीखों का ऐलान होते ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी कर दी, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी नाम है. अब तक पार्टी चार सूचियां जारी करके 136 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों का चेहरा साफ कर चुकी है. कांग्रेस की ओर से अब तक किसी भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है.

इससे पहले पार्टी ने तीन सूचियों (39+39+1) में 79 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए थे, जिनमें से 76 सीटों पर कांग्रेस के विधायक थे. वहीं, मौजूदा सूची की सभी 57 विधानसभा सीटों पर वर्तमान में भाजपा के विधायक हैं. मतलब कि चौथी सूची में भाजपा ने किसी का टिकट नहीं काटा है.

इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी उनके विधानसभा क्षेत्र बुदनी से नाम है. इस तरह उन कयासों को विराम लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इस बार पार्टी शिवराज का टिकट काटने का मन बना चुकी है या शिवराज अपने बेटे कार्तिकेय को अपनी पारंपरिक सीट से लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं.

शिवराज समेत मंत्रिमंडल के 34 में से 25 मंत्रियों के नाम इस सूची में हैं, जिससे बड़ी संख्या में मंत्रियों के टिकट काटे जाने की संभावनाओं पर भी विराम लग गया है. साथ ही, यह भी स्पष्ट हो गया है कि आठ मंत्रियों – महेंद्र सिंह सिसोदिया, उषा ठाकुर, इंदर सिंह परमार, राम खेलावन पटेल, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गौरीशंकर बिसेन और ओपीएस भदौरिया- को लेकर भाजपा असमंजस में है. बाकी एक मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया चुनाव लड़ने से इनकार कर चुकी हैं.

खास बात यह है कि इन 8 में से 4 सिंधिया खेमे के मंत्री हैं. जबकि सिंधिया खेमे के अन्य पांच मंत्रियों- तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. प्रभुराम चौधरी, प्रद्युम्न सिंंह तोमर और राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव- को टिकट दिया गया है.

वर्ष 2020 में सिंधिया के साथ कुल 22 विधायकों ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, जिनमें 19 सिंधिया समर्थक थे और बाकी 3 विधायक कांग्रेस सरकार में अपनी मांगें पूरी न होने के चलते उनके साथ आ गए थे. उपचुनाव में 19 सिंधिया समर्थकों में से 13 को जीत मिली थी. यानी सिंधिया की ताकत 13 विधायकों तक सीमित हो गई थी. अब उनके खेमे से चार नामों पर और तलवार लटक रही है. हालांकि, पार्टी की पिछली सूचियों में पूर्व मंत्री इमरती देवी समेत कुछ सिंधिया समर्थकों के नाम जरूर थे.

कांग्रेस की सरकार गिराने में भूमिका निभाने के लिए मंत्री पद से नवाजे गए बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग पर भी भाजपा ने भरोसा दिखाया है. हालांकि, जयसिंह नगर और जैतपुर विधानसभा सीटों पर भाजपा ने फेरबदल किया है. जयसिंह नगर के विधायक जयसिंह मरावी को जैतपुर से और जैतपुर विधायक मनीषा सिंह को जयसिंह नगर सीट से मैदान में उतारा है. विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को भी टिकट दिया गया है.

भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत 7 सांसदों को चुनावी रण में उतारा था. साथ ही, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी टिकट दिया गया था. वर्तमान सूची में उनके विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय का नाम न होने से उनका टिकट कटने की संभावनाओं को बल मिला है. अब केवल 94 सीट पर भाजपा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होना बाकी है. जिनमें 27 सीट ऐसी हैं जिन पर पिछले चुनाव में भाजपा की हार हुई थी, जबकि 67 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं. वर्तमान सूची में सिर्फ भाजपा विधायकों के नाम होने से यह स्पष्ट है कि इन 67 सीटों पर भाजपा उधेड़-बुन में है, इसलिए ये नाम रोक दिए गए हैं. संभव है कि अगली सूचियों में बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटे जाएं. वहीं, वर्तमान सूची में केवल चार महिला प्रत्याशियों के नाम हैं.

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अब तक अपने किसी भी उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है. हाल ही में दिल्ली में आयोजित केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में नामों को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई है. बता दें कि 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 127 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 96 विधायक हैं. 4 विधायक निर्दलीय हैं और 2 सीट पर बहुजन समाज पार्टी और एक पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं.

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