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केवीके द्वारा “मसूर उत्पादक कृषकों की समस्याएं एवं समाधान” विषय पर कृषक गोष्ठी का आयोजन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां चित्रकूट द्वारा चयनित ग्राम अरवारा मानिकपुर चित्रकूट में गुरुवार को आदर्श दलहन योजनांतर्गत “मसूर उत्पादक कृषकों की समस्याएं एवं समाधान” विषय पर कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें दलहन फसलों का उद्देश्य एवं महत्त्व पर चर्चा करते हुए केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि दलहन फसलें मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं मृदा स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है यदि किसान भाई/ बहन जायद मौसम मे दलहन मूंग की खेती के क्षेत्रफल मे वृद्धि करें तो आय, पर्यावरण एवं मृदा स्वास्थ्य में लाभ प्राप्त होगा साथ ही इस हेतु सभी ग्राम वासियों को संकल्प भी दिलाया गया।

केन्द्र के मत्स्य वैज्ञानिक कमला शंकर शुक्ला ने एकीकृत फसल प्रणाली को बढ़ावा देते हुए कहा कि परिवार की आवश्यकताओ की पूर्ती के साथ साथ आर्थिक बचत के लिए कृषकों को एक एकड़ एवं डेढ़ एकड़ एकीकृत मॉडल बनाकर खेती करनी चाहिए। ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु रोजगार के प्रति ध्यान आकर्षित कराते हुए अनिल सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान चित्रकूट ने कौशल विकास एवम उद्यमिता मंत्रालय द्वारा कृषि एवं गैर कृषि क्षेत्र में संचालित विभिन्न रोजगार परख कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि कृषि में युवाओं के लिए स्वरोजगार की अपार संभावनाएं है। जिसमें पशु पालन के अन्तर्गत डेयरी फार्मिंग (गाय, भैंस), पोल्ट्री फार्मिंग (मुर्गीपालन), बकरी पालन, और मछली पालन , बागवानी और औषधीय पौधे से फल, सब्जी, फूल और गिलोय, तुलसी जैसे औषधीय पौधों की खेती और उनसे उत्पाद बनाना, खाद्य प्रसंस्करण में अनाजों, फलों, सब्जियों को संसाधित करके आटा, तेल, जैम, जूस, अचार, चिप्स आदि बनाना. मशरूम उत्पादन इकाई और जैविक खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनाना के साथ साथ शहद उत्पादन का कार्य करके कृषि से रोजगार किया जा सकता है।

आदर्श दलहन ग्राम योजना एवं उन्नत ग्राम योजना पर चर्चा करते हुए उपनिदेशक कृषि चित्रकूट राजकुमार ने कहा कि जायद मौसम में खाली पड़ी जमीनों मे दलहन मूंग की फसल बुबाई कर मृदा स्वास्थ्य एवं आय मे वृद्धि होंगी। अरवारा गावं उन्नत ग्राम योजना मे चयनित किया गया है और इसके अंतर्गत एक एकीकृत फसल मॉडल तैयार किया गया है जिसे आप सभी किसान भाई देखकर फसल एकीकृत पद्धति के मॉडल तैयार कर पारिवारिक आवश्यकताओ की पूर्ती के साथ आर्थिक सहायता प्राप्त होंगी। उन्होंने सोलर फेंसिंग से फसल सुरक्षा के बारे में बताते हुए कहा कि यह योजना 10 हेक्टेयर भूमि के लिए है जिसमे कई किसान एक साथ मिलकर इस योजना का लाभ ले सकते है और प्रत्येक मौसम अपनी फसल को पशुओं से सुरक्षित कर सकते है।

कार्यक्रम के अंत में सभी अथितियों का आभार व्यक्त करते हुए विजय कुमार गौतम आदर्श दलहन ग्राम योजना प्रभारी ने कहा कि अरवारा ग्राम पंचायत के अलावा अन्य पंचायतों के किसानों को भी इस योजना मे शामिल करना है जिससे अन्य कृषक भी लाभान्वित होंगे। तत्पश्चात उन्नत ग्राम योजना के माध्यम से तैयार एकीकृत फसल पद्धति मॉडल का अवलोकन किया गया। अवलोकन के दौरान उपनिदेशक कृषि चित्रकूट द्वारा मॉडल की सराहना की गयी साथ ही प्राकृतिक उत्पाद इकाई और प्राकृतिक पद्धति से गेंहूँ फसल प्रदर्शन का अवलोकन किया गया। उन्नत योजना द्वारा निर्मित एकीकृत खेती मॉडल एवं प्राकृतिक खेती का विस्तृत जानकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा मौसम वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवा द्वारा दी गयी। कार्यक्रम के दौरान लगभग 135 कृषकों की सहभागिता रही।

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