kawad yatra 2019 : सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली कांवड़ यात्रा का बहुत महत्व है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। श्रावण के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। भगवान शिव को समर्पित इस कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगा जल या फिर किसी नदी विशेष के शुद्ध जल से अपने ईष्ट देव का जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक से प्रसन्न होकर भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, लेकिन ध्यान रहे कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें तोड़ने पर न सिर्फ यह यात्रा अधूरी रह जाती है। कांवड़ यात्रा के नियम जानने के लिए आगे देखिये—
कांवड़ यात्रा के दौरान बगैर स्नान किए कांवड़ को स्पर्श करना मना होता है, इसलिए नहाने के बाद ही अपना कांवड़ लेकर आगे बढ़ें।
भगवान शिव को समर्पित इस यात्रा के दौरान कभी भी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता है। यदि कहीं शौच, विश्राम आदि के लिए रुकना ही पड़ जाए तो इसे पेड़ आदि ऊंचे स्थानों पर रखा जाता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान पवित्रता का पूरा ख्याल रखें और कांवड़ यात्रा के दौरान चमड़े से बनी किसी चीज का न तो प्रयोग करें और न ही स्पर्श करें।
कांवड़ को सिर के ऊपर रखकर ले जाना वर्जित है। इसके अलावा किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कांवड़ को रखना मना है।
भोले के भक्तों को कांवड़ यात्रा के दौरान गलत शब्दों का प्रयोग, क्रोध और विवाद नहीं करना चाहिए।
कांवड़ यात्रा के दौरान बोल बम और जय शिव-शंकर का जयकारा या फिर शिव मंत्रों का जप या मनन करें।
कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नशा जैसे मांस, मदिरा, भांग आदि का सेवन न करें। इस पावन यात्रा के दौरान भूलकर भी तामसिक भोजन न करें।
कांवड़ यात्रा के इन तमाम नियमों के पालन साथ भगवान शिव के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति भाव होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। शुचिता, पवित्रता और संकल्प के साथ की गई इस यात्रा से प्रसन्न होकर कल्याण के देवता भगवान शिव अपने भक्तों पर अवश्य कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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