
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. कॉलेजियम की एकमात्र महिला जज जस्टिस बीवी नागारत्ना ने उनकी वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए इस सिफारिश का विरोध किया.
नागरत्ना के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने जस्टिस पंचोली पर 4-1 से विभाजित फैसला सुनाया, जिसमें शीर्ष अदालत की एकमात्र महिला न्यायाधीश ने उनकी पदोन्नति के संबंध में असहमति जताई.
नागरत्ना ने उनकी वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए इस सिफारिश का विरोध किया. जस्टिस पंचोली वर्तमान में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 57वें स्थान पर हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सुप्रीम कोर्ट ने अपने चयन मानदंड के रूप में नियमित रूप से तीन कारकों को रेखांकित किया है – उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त वरिष्ठता, प्रतिनिधित्व का सिद्धांत तथा ‘योग्यता और सत्यनिष्ठा’.
नागरत्ना की चिंता गुजरात हाईकोर्ट से एक और न्यायाधीश की सिफारिश करने को लेकर थी. दरअसल, जस्टिस एनवी अंजारिया (गुजरात हाईकोर्ट से ही) को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए तीन महीने से भी कम समय में हुए हैं.
गुजरात हाईकोर्ट में लगभग दो दशक तक सेवा देने के बाद जस्टिस पंचोली को 24 जुलाई, 2023 को पटना हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया था.
मई में जब जस्टिस पंचोली की उम्मीदवारी पर पहली बार चर्चा हुई थी, तो कॉलेजियम के कम से कम दो न्यायाधीशों ने कथित तौर पर उनकी वरिष्ठता की कमी पर चिंता व्यक्त की थी. तब जस्टिस पंचोली को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. केंद्र सरकार ने 14 जुलाई, 2025 को इसे मंजूरी दे दी.