ब्रेकिंग:

बीबीएयू में सत्र 2025-26 के नव विद्यार्थियों के लिए हुआ इंटरेक्शन सह इंडक्शन ‘दीक्षारम्भ – 2025’ का आयोजन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ में मंगलवार 27 अगस्त को छात्र कल्याण अधिष्ठाता टीम की ओर से शैक्षणिक सत्र 2025-26 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंटरेक्शन सह इंडक्शन प्रोग्राम ‘दीक्षारंभ- 2025’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. जे.पी. पाण्डेय उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के ट्रस्टी प्रो. पी. कंगासाबापति जी, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स, बीबीएयू प्रो. एस. विक्टर बाबू, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार एवं डिप्टी डीएसडब्ल्यू प्रो. तरूणा उपस्थित रहीं। सर्वप्रथम प्रो. नरेंद्र कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया। मंच संचालन का कार्य डॉ. तरूणा द्वारा किया गया।

बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समय का सदुपयोग कर जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास प्रत्येक युवा की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में नौकरी पाने की प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है, जबकि युवाओं को नौकरी देने की सोच विकसित करनी चाहिए, क्योंकि नौकरियों की संख्या सीमित है परंतु उद्यमिता (Entrepreneurship) के माध्यम से विकास असीमित है।

एकेटीयू, लखनऊ के कुलपति प्रो. जे.पी. पाण्डेय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं है, बल्कि यह प्रेरणा का स्रोत भी है। प्रेरणा लेकर ही हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करना सीखना चाहिए, क्योंकि छोटे-छोटे संघर्ष और चुनौतियाँ ही हमें महान और सक्षम व्यक्ति बनाती हैं। उन्होंने टीम वर्क के महत्व को समझाते हुए कहा कि ‘TEAM का अर्थ है – Together Everyone Achieve More’, अर्थात मिलकर कार्य करने से ही बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है।

प्रो. पी. कंगासाबापति ने चर्चा के दौरान कहा कि भारत का 300–400 वर्षों का इतिहास अत्यंत भव्य और गौरवशाली रहा है, क्योंकि उस समय भारत ज्ञान, दर्शन, सुख और समृद्धि का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। परंतु विदेशी आक्रांताओं ने भारत की जड़ों को कमजोर करने का प्रयास किया और सबसे पहले हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली को नष्ट किया, क्योंकि शिक्षा ही किसी भी समाज में परिवर्तन लाने और उसे दिशा देने का वास्तविक आधार होती है।

प्रो. एस. विक्टर बाबू ने बताया कि किसी भी विचार (Idea) की शक्ति अपार होती है, क्योंकि एक विचार पूरी दुनिया को बदल सकता है। प्राचीन समय में समाज में भले ही लोकतंत्र का स्वरूप न रहा हो, परंतु उस समय भी सामाजिक अस्तित्व और सामूहिक जीवन का विचार विद्यमान था।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. तरूणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण कर्मचारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी मौजूद रहे।

Loading...

Check Also

प्लेऑफ की दौड़ में बरकरार कानपुर सुपरस्टार्स : कप्तान रिज़वी के 78 रनों की बदौलत टीम ने हासिल की जीत

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : यूपी टी20 लीग में प्लेऑफ़ की दौड़ में बने …

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com