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कृषक संगोष्ठी में दलहनी फसलों के उत्पादन में क्षेत्रफल बढ़ाने पर दिया गया जोर

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय की 58 वीं पुण्यतिथि समारोह के रूप में मनाई गई। प्रातःकाल से ही संस्थान के विविध प्रकल्प गुरुकुल संकुल, उद्यमिता विद्यापीठ, सुरेन्द्रपॉल ग्रामोदय विद्यालय, आरोग्यधाम, आईटीआई तथा खादी ग्रामोद्योग आयोग प्रशिक्षण केन्द्र के प्रशिक्षणार्थी एवं बच्चों तथा कार्यकर्ताओं द्वारा अपने-अपने प्रकल्पों में दीनदयाल जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किये गये तथा कार्यकर्ताओं एवं बच्चों द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन से जुडे प्रेरणादायी प्रसंगों को दैनिक जीवन में आत्मसात करने हेतु मंचन भी किया गया।

पुण्यतिथि अवसर पर बड़ा कार्यक्रम कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवा एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय उष्ण बागवानी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गर्मियों में मूंग उत्पादन हेतु कृषकों को प्रेरित किया गया। अपने संबोधन में उप निदेशक कृषि राजकुमार जी ने कहा कि कहा कि सभी कृषकों को ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र से जुड़कर अपनी अधिकतम भूमि का उपयोग करना चाहिए। इस दिशा में कृषि विभाग द्वारा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को दलहनी फसलों का आयात करना पड़ रहा है, जिसे कृषकों के सामूहिक प्रयासों से कम किया जा सकता है। गर्मी में दलहनी फसल के रूप में मूंग उत्पादन में क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का दृष्टिकोण “एकात्म मानवदर्शन” पर आधारित था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे आत्मनिर्भर और संतुलित राष्ट्र का निर्माण करना था, जहाँ कृषि और उद्योग दोनों ही आम आदमी के जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकें। कृषिगत विकास हेतु जिले में उन्नत किस्म के बीजों की उपलब्धता तथा आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है । ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन हेतु मूंग का बीज कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

केंद्र के वैज्ञानिक कमलाशंकर शुक्ला ने कृषकों से मृदा परीक्षण कराकर खेती करने की सलाह दी साथ ही दलहन उत्पादन के क्षेत्र में विस्तार सुनिश्चित करने जिससे उत्पादन को अच्छा बाजार मिल सके एवं सामूहिक प्रयास से लागत घटाने और आय में वृद्धि करने पर बल दिया । अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि और उद्योग के बीच संतुलन के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत चाहते थे। उनका मानना था कि कृषि देश की रीढ़ है, इसलिए उन्होंने ‘हर हाथ को काम, हर खेत को पानी’ का नारा दिया और जैविक खेती व छोटे उद्योगों पर जोर दिया।

इस अवसर पर कृषकों द्वारा गर्मियों में मूंग की फसल करने हेतु सामुहिक शपथ जी गई एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय उष्ण बागवानी संस्थान के डॉ कुलदीप एवं डॉ सिद्धार्थ कुमार द्वारा कृषकों को आंवला,अमरूद, बेल, जामुन , नीबू के निःशुल्क पौध वितरण किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक रोहित कुमार मिश्रा द्वारा किया गया । कार्यकम में तीन ग्राम पंचायतों के लगभग 150 महिला / पुरुष कृषक उपस्थित रहे।

दीनदयाल शोध संस्थान के सभी स्वाबलंबन ग्रामीण केंद्रों पर भी दीनदयाल जी की पुण्यतिथि मनाई गई। कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां सहित आवासीय शैक्षणिक प्रकल्प रामनाथ आश्रम शाला पीली कोठी, कृष्णा देवी वनवासी बालिका आवासीय विद्यालय मझगवां, परमानन्द आश्रम पद्धति विद्यालय गनीवां तथा जन शिक्षण संस्थान में पंडित दीनदयाल जी के  ‘एकात्म मानववाद’ का दर्शन पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई। 

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