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आचार्य मनीष भाई द्वारा श्रीमद भागवत कथा और हनुमान चालीसा पाठ अनुष्ठान का गरिमा पूर्ण समापन

आचार्य मनीष भाई ने संकट समाप्ति के लिए चित्रकूट आकर मंदाकिनी स्नान और कामदगिरि की परिक्रमा करने को कहा

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : चित्रकूट में चल रही आचार्य मनीष भाई वृंदावन की श्रीमद् भागवत कथा और हनुमान चालीसा पाठ के अंतिम दिन व्यास पीठ से चित्रकूट धाम तीर्थ की महिमा का वर्णन किया गया। इस मौके पर आचार्य मनीष भाई ने कहा चित्रकूट धाम छेत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। चित्रकूट धाम का आश्रय लेने वाले का संकट स्वमेव नष्ट हो जाता है अर्थात यहां पर आने वालों का कष्ट दूर हो जाता है। पांडव एवम नल दमयंती का कष्ट यहीं दूर हुआ है। आचार्य मनीष भाई ने मानव जीवन में आने वाले किसी भी प्रकार के संकट को दूर करने का सर्वमान्य स्थान चित्रकूट धाम को बताते हुए कहा कि जो भी चित्रकूट आकर श्रद्धा और विश्वास के साथ पावन सलिला मंदाकिनी में स्नान करता है और श्री कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करता है, उसके सारे संकट समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने सर्वविदित ” चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा परत है वह आवत यह देश” के समर्थन में अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। इसी श्रृंखला में मनीष भाई ने मंदाकिनी नदी का अदभुत प्रभाव बताते हुए बताया कि दक्ष द्वारा नारद को दिया गया श्राप मंदाकिनी नदी में स्नान करने मात्र से ही निष्प्रभावी हो गया था। इस मौके पर आचार्य मनीष भाई ने संकट समाप्ति हेतु चित्रकूट में मंदाकिनी स्नान और कामदगिरि की परिक्रमा करने को कहा। साथ ही भागवत कथा की दक्षिणा के रूप में व्यास पीठ ने श्रोताओं से प्रभु से सतत अनुराग बनाए रखने का आश्वासन लिया।

भागवत कथा की दक्षिणा के रूप में व्यास पीठ ने श्रोताओं से प्रभु अनुराग बनाए रखने का आश्वासन लिया

श्री हनुमान जी महाराज के आध्यात्मिक सानिध्य और महामंडलेश्वर स्वामी राम शिरोमणि दास महाराज के मार्गदर्शन में श्री धर धाम चित्रकूट में आचार्य मनीष भाई वृंदावन के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीमद भागवत कथा श्रवण के साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजन किया गया है। इस विशेष कार्यक्रम में शामिल श्रीमद भागवत कथा के यजमान का दायित्व महेंद्र कुमार सीमा गोयल दिल्ली और हनुमान चालीसा पाठ के यजमान का दायित्व रामेश्वर दयाल सुनीता वर्मा (सोनी) फरीदाबाद ने संयुक्त रूप से निभाया। कथा विराम के पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी राम शिरोमणि महाराज ने संतों को दक्षिणा सेवा अर्पित करते हुए युवा कथावाचक आचार्य मनीष भाई वृंदावन के व्यक्तित्व और कृतित्व की मुक्त कंठ से सराहना की और उनके गुण गौरव का बखान करते हुए इस कार्यक्रम के प्रबंधन का भी श्रेय दिया। इसी क्रम में महामंडलेश्वर स्वामी राम शिरोमणि महाराज ने चित्रकूट प्रवास हुए उनके आश्चर्य जनक स्वास्थ्य सुधार का हृदयस्पर्शी अनुभव साझा किया। ज्ञातव्य हो कि आचार्य मनीष भाई वृंदावन चित्रकूट जिले में स्थित संत तुलसी की जन्म स्थली राजापुर और उनकी धर्मपत्नी रत्नावली के निवास महेवा के निकट स्थित भदेहदू गांव के निवासी हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी राम शिरोमणि महाराज ने चित्रकूट प्रवास हुए स्वास्थ्य सुधार का अनुभव साझा किया

श्री मदभागवत कथा व्यास पीठ से सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य मनीष भाई ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण देना सिखाते हैं। भगवान जब देते हैं, इज्जत के साथ देते हैं। पाने वाले को भी नहीं पता चलता कि कब उसकी तिजोरी भर गई। लेकिन आदमी का स्वभाव है कि वह देता कम है और दिखाता ज्यादा है। इसी क्रम में आचार्य श्री ने श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि बंजर भूमि में यदि बार-बार हल चलाया जाए तो उपजाऊ हो जाता है। इसी प्रकार यदि बार-बार भगवान की कथा सुनी जाए तो जीव के मन रूपी शुष्क भूमि में भगवत भक्ति का बीज अंकुरित हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की मंगलमय कथा तीन प्रकार के लोगों का कल्याण करती है, पहला जो भगवान की कथा कहता है, दूसरा जो कथा सुनता है और तीसरा जो कथा की प्रशंसा या अनुमोदन करता है।
इसी श्रृंखला में आचार्य मनीष भाई ने श्रीमद् भागवत कथा परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए बताया कि भागवत कथा सुनने से जीवन का उद्धार होता है। भागवत कथा कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। भागवत कथा सुनने से मन आत्मा को परम सुख की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। उन्होंने मित्र और मित्रो के गुणों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है।अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है।मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे।
भागवत कथा श्रवण कराते हुए आचार्य मनीष भाई ने बताया कि राजा परीक्षित ने व्यासपुत्र शुकदेव मुनि से सात दिनों तक भागवत कथा सुनी थी. तभी से भागवत कथा सुनने की परंपरा शुरू हुई थी। भागवत कथा को सुनने से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। साथ ही भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से व्यक्ति में भक्ति ,ज्ञान और वैराग्य के भाव भी आते हैं। कार्यक्रम के अंतिम चरण में हवन, गोदान ,संतों की चकाचक सेवा और विदाई दी गई।

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