
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ, यानी मार्कफेड, ने धान उपार्जन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी निगरानी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का उपयोग किया गया है। अब राज्य के 2,739 उपार्जन केंद्रों पर धान की रीयल-टाइम निगरानी की जा रही है।
छत्तीसगढ़ में धान की खरीद हर साल बढ़ती जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देश में सबसे अधिक होने के कारण कभी-कभी धोखाधड़ी की घटनाएं भी सामने आती थीं। पिछले वर्षों में बालोदा बाजार, बिलासपुर और रायगढ़ जैसे जिलों में करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई, जिसमें फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और धान की चोरी शामिल थी। अनुमान है कि सिर्फ 1% लीकेज से भी सरकार को सालाना लगभग 464 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
इन समस्याओं से निपटने के लिए मार्कफेड ने आईटीआई लिमिटेड के साथ साझेदारी की। इस योजना के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी आईएसएस अधिकारी जितेंद्र कुमार शुक्ला के देख-रेख में की जा रही है। यह तकनीकी पहल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू की गई है। यह धान खरीद प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू हुई और 31 जनवरी 2026 तक चलेगी।
मार्कफेड ने अधिकारियों के लिए ऐप भी विकसित किया है। इसके जरिए अधिकारियों को जीपीएस आधारित उपस्थिति, अलर्ट डैशबोर्ड और भूमिका-आधारित पहुंच नियंत्रण की सुविधा मिलती है।
जिला स्तरीय प्रतिक्रिया टीमों के माध्यम से जमीन पर भी निगरानी होती है। नोडल अधिकारी और पर्यवेक्षक समस्याओं का तुरंत समाधान करते हैं।
मार्कफेड प्रबंध निदेशक ने कहा कि, “यह परियोजना न केवल आर्थिक नुकसान को कम करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को कृषि-तकनीकी शासन में अग्रणी राज्य बनाएगी। इसका मूल मंत्र है – “किसानों को सशक्त बनाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना, विश्वास का निर्माण।”
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