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अडानी धोखाधड़ी केस : हिंडनबर्ग की अडानी को चुनौती : ‘आप कोर्ट में आइए’ हम अपनी रिपोर्ट पर कायम !

सूर्योदय भारत समाचार सेवा : धोखाधड़ी के आरोपों के बाद अरबों रुपये का नुकसान झेलने पर भारतीय अरबपति गौतम अदानी ने रिसर्च कंपनी के दावों का जवाब दिया है. वहीं, हिंडनबर्ग ने भी जवाब में कहा है कि वो अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम है.

अडानी ने कहा

एशिया के सबसे अमीर आदमी ने कहा कि उनके फ़र्म पर शेयरों में खुलेआम धांधली और अकाउंटिंग फ्रॉड करने के आरोप लगाए गए हैं जो ठीक नहीं.

गौतम अदानी की कंपनी अदानी ग्रुप ने अमेरिकी निवेश फ़र्म की रिपोर्ट को ‘दुर्भावनापूर्ण’ और ‘चुनिंदा ग़लत जानकारी’ पेश करने का आरोप लगाया है.

बुधवार को रिसर्च सार्वजनिक किए जाने के बाद अडानी ग्रुप को अपने शेयरों की क़ीमत में क़रीब 11 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है.

अब अदानी ग्रुप न्यूयॉर्क की हिंडनबर्ग रिसर्च पर क़ानूनी कार्रवाई के बारे में विचार कर रहा है. उधर हिंडनबर्ग ने कहा है कि वे अपनी रिपोर्ट पर क़ायम हैं और क़ानूनी कार्रवाई का स्वागत करेंगे

अडानी ग्रुप भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और उसका कारोबार कमोडिटी ट्रेडिंग, एयरपोर्ट, यूटिलिटी और रिन्यूबल एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में फैला है.

फ़ोर्ब्स मैग्ज़ीन के मुताबिक़, इस ग्रुप के मालिक भारतीय अरबपति मिस्टर अदानी दुनिया के चौथे सबसे धनी व्यक्ति हैं.

हिंडनबर्ग ‘शॉर्ट सेलिंग’ की स्पेलिस्ट है यानी वो ऐसी कंपनियों के शेयर में सट्टा लगाती है जिनके भाव गिरने की अपेक्षा हो.

हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा है कि वो किसी भी तरह के क़ानूनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं और अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं.

उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, “हमारी रिपोर्ट आने के बाद पिछले 36 घंटों में अदानी ने एक भी गंभीर मुद्दे पर जवाब नहीं दिया है. हमने रिपोर्ट के निष्कर्ष में 88 सटीक सवाल पूछे थे जो कि हमारे मुताबिक कंपनी को अपने आप को निर्दोष साबित करने का मौका देता है.”

“अभी तक अदानी ने एक भी जवाब नहीं दिया है. साथ ही जैसा कि हमें उम्मीद थी, अदानी ने धमकी का रास्ता चुना. मीडिया को एक बयान में अदानी ने हमारी 106 पन्नों की, 32 हज़ार शब्दों की और 720 से ज़्यादा उदाहरण के साथ दो सालों में तैयार की गई रिपोर्ट को “बिना रिसर्च का” बताया और कहा कि वो हमारे ख़िलाफ़, “दंडात्मक कार्रवाई के लिए अमेरिकी और भारतीय कानूनों के तहत प्रासंगिक प्रावधानों का मूल्यांकन कर रहे हैं.”

“जहां तक कंपनी के द्वारा क़ानूनी कार्रवाई की धमकी की बात है, तो हम साफ़ करते हैं, हम उसका स्वागत करेंगे. हम अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह से कायम हैं, और हमारे ख़िलाफ़ उठाए गए क़ानूनी कदम आधारहीन होंगे.”

“अगर अदानी गंभीर हैं, तो उन्हें अमेरिका में केस दायर करना चाहिए. दस्तावेज़ों की एक लंबी लिस्ट है जिसकी क़ानूनी प्रक्रिया के दौरान हम डिमांड करेंगे.”

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट

अपनी रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने अदानी पर ‘कारपोरेट दुनिया की सबसे बड़ी धोखाधड़ी’ का आरोप लगाया है. ये आरोप ऐसे समय आया है जब अदानी ग्रुप के शेयरों की सार्वजनिक बिक्री लॉंच होने वाली है.

रिपोर्ट ने मॉरिसस और कैरिबियन जैसे विदेशी टैक्स हैवेन में मौजूद कंपनियों पर अदानी ग्रुप की मिल्कियत पर सवाल खड़ा किया है.

इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि अदानी की कंपनियों पर पर्याप्त क़र्ज़ है जो पूरे ग्रुप को ‘वित्तीय तौर पर बहुत जोख़िम वाली स्थिति’ में डालता है.

लेकिन गुरुवार को, अदानी ग्रुप ने कहा कि वो हिंडनबर्ग रिसर्च के ख़िलाफ़ भारत और अमेरिका में ‘सुधारात्मक और दंडात्मक’ कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है.

अदानी ने कहा है कि वो हमेशा से ही ‘क़ानूनों का पालन’ करते रहे थे.

अदानी की लीगल टीम के ग्रुप हेड जतिन जालुंधवाला ने कहा, “रिपोर्ट ने भारतीय शेयर बाज़ार में जो उतार चढ़ाव पैदा किया है, वो बहुत चिंताजनक है और भारतीय नागरिकों के लिए अनचाही पीड़ा का सबब बना है.”

उन्होंने कहा, “साफ़ है कि ये रिपोर्ट और इसके अप्रमाणित तथ्य इस तरह पेश किए गए कि इसका अदानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों की क़ीमत पर बुरा असर पड़े क्योंकि हिंडनबर्ग रिसर्च ने खुद ये माना है कि अदानी के शेयरों के गिरने से उसको फ़ायदा पहुंचेगा.”

ग्रुप की फ़्लैगशिप फ़र्म, अदानी एंटरप्राइज़ेज के शेयरों की बिक्री शुक्रवार से शुरू होनी है.

हिंडनबर्ग का जवाब

गुरुवार को अडानी समूह की ओर जारी बयान के बाद हिंडनबर्ग ने भी जवाब दिया है.

हिंडनबर्ग ने अपने बयान में कहा, “अदानी ने हमारे द्वारा उठाए गए एक भी मुद्दे को संबोधित नहीं किया है. हमने अपनी रिपोर्ट में 88 सवाल पूछे थे. अब तक अदानी ने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया है.”

अडानी ग्रुप द्वारा क़ानूनी कार्रवाई की बात के जवाब में हिंडनबर्ग ने कहा, “क़ानूनी कार्रवाई का हम स्वागत करेंगे. हम अपनी रिपोर्ट पर क़ायम हैं और हमारा मानना है कि हमारे ख़िलाफ़ उठाया गया कोई भी कानूनी कदम ‘अयोग्य’ साबित होगा.”

“अगर अडानी गंभीर हैं तो उन्हें हमारे ख़िलाफ़ अमेरिका में केस फ़ाइल करना चाहिए जहां हमारे दफ़्तर हैं. हमारे पास उन दस्तावेज़ों की लंबी सूची है जिनकी मांग हम ‘लीगल डिस्कवरी प्रोसेस’ में करेंगे.”

राजनीतिक प्रतिक्रिया

उन विपक्षी राजनेताओं ने इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देने में देरी नहीं की जो लंबे समय से ये आरोप लगाते रहे हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नज़दीकियों के कारण अदानी लाभान्वित होते रहे हैं.

शिव सेना की नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया है, “सार्वजनिक हो चुकी विस्तृत रिसर्च के मद्देनज़र, ये महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार इन आरोपों का संज्ञान ले.”

दक्षिण भारत के एक अन्य लोकप्रिय राजनेता केटी रामाराव ने भारत की जांच एजेंसियों और बाज़ार नियामक से अदानी ग्रुप की गतिविधियों की जांच शुरू करने की मांग की है.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि नियामकों की ओर से कोई भी स्वतंत्र कार्रवाई शुरू करने की कम ही संभावना है.

गवर्नेंस मुद्दों पर निवेशकों को सलाह देने वाली कंसल्टेंसी ‘इन-गवर्न रिसर्च’ के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीराम सुब्रमण्यम ने कहा, “सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ़ इंडिया यानी सेबी (भारत में लिस्टेड कंपनियों का नियमन करने वाली संस्था) तभी कार्रवाई करेगी जब उसे विशेष शिकायत भेजी जाएगी. और इस मामले में ऐसा नहीं है.”

उनके मुताबिक, “रिपोर्ट में कई आरोप लगाए गए हैं जो अतीत में रेगुलेटरी स्क्रूटनी का विषय रहे हैं.”

मिडिया ने बाज़ार नियामक से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

वित्तीय बाज़ार के विश्लेषक अम्बरीश बलिगा ने कहा कि, “ऐसा दिखता है कि शुक्रवार को 2.4 अरब डॉलर के पब्लिक शेयर की बिक्री के लिए अडानी ग्रुप के आगे बढ़ने का रास्ता साफ़ है लेकिन रिपोर्ट में लगाए गए आरोप निवेशकों पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं.”

लेकिन इस रिपोर्ट से अदानी ग्रुप को भविष्य में ख़ासा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

न्यूज़ सर्विस ब्लूमबर्ग में लेख लिखने वाले एंडी मुखर्जी ने कहा, “अडानी से परे, यह घटना व्यापक भारतीय बाज़ार की ईमानदारी को लेकर कई सवाल खड़े करती है, जो वित्तीय वैश्विकरण और राजनीतिक राष्ट्रवाद के बीच दबाव में फंसी हुई है.”

वो पूछते हैं, “क्या सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया आगे बढ़ने और बाज़ार को साफ़ सुथरा करने के लिए जनता के असंतोष का इंतज़ार कर रही है?”

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