अहमदाबाद: केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज बताया कि 2 अक्टूबर, 2019 से आयकर अधिकारी किसी भी व्यक्ति को सीधे कर संबंधी नोटिस नहीं भेज पाएंगे। संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रसाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की उपलब्धियां गिनाईं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि 2 अक्टूबर से कोई भी इनकम टैक्स नोटिस सीधे नहीं भेजी जा सकेगी। कानून मंत्री बताया कि हर नोटिस एक केंद्रीयकृत सिस्टम या प्रणाली में आएगी और वहां इसकी उचित पड़ताल के बाद ही इसे आगे भेजा जाएगा। इससे आयकर अधिकारी बेलगाम ढंग से आयकर नोटिस भेजने के फैसले नहीं ले पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता से संबंधित मुद्दों पर कानून मंत्रालय अध्ययन कर रहा है। संचार, इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभागों के भी प्रभारी मंत्री रविशंकर ने पिछली तिमाही के दौरान जीडीपी वृद्धि दर के घट कर 5.1 प्रतिशत हो जाने की बात स्वीकार करते हुए इसके लिए वैश्विक और कुछ घरेलू कारणों को जिम्मेदार बताया पर दावा किया देश की अर्थव्यव्था का आधार अब भी बेहद मजबूत है।
क्योंकि महंगाई, वित्तीय घाटा आदि नियंत्रण में हैं और विदेशी निवेश और मुद्रा भंडार आदि बेहतर हैं। देश का कर आधार और संग्रह बढ़ा है। देश अब भी सबसे तेजी से बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई कदम भी उठाए हैं जिनमें कारपोरेट टैक्स कम करना, बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपए की मदद, 10 बैंकों का विलय आदि शामिल हैं। रोजगार के बारे में चर्चा करते हुए प्रसाद ने कहा कि पिछले साल देश में 45 वर्ष की सबसे अधिक बेरोजगारी होने की बात संबंधी रिपोर्ट सही नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह एक ड्राफ्ट भर था जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन तथा अन्य कई क्षेत्रों के रोजगारी के आंकड़ों की अनदेखी की गई थी। वह एक तरह से पूर्वाग्रह ग्रस्त था। देश बदल रहा है और सरकार सभी को नौकरी नहीं दे सकती पर रोजगार के अवसर जरूर उपलब्ध करा रही है। ईपीएफओ के हिसाब से ही सितंबर 2017 से जून 2019 के बीच पौने तीन करोड़ नए लोगों को रोजगार मिला है। निराशा का माहौल सही नहीं है। देश बदल रहा है, बढ़ रहा है और विकास कर रहा है। प्रसाद ने कहा कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून देश हित में है क्योंकि देश में सबसे अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मरते हैं और यह संख्या आतंकवाद से मरने वालों से भी ज्यादा होती है। इससे सबसे अधिक गरीबों की ही जाने जाती हैं।
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