भोपाल: लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित होने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को साल 2003 में की गई अपनी सियासी गलती अचानक याद आ गई। उन्होंने बुधवार को सरकारी कर्मचारी संघ के होली मिलन समारोह में 16 साल पहले दिए गए अपने बयान के लिए माफी मांगी। भोपाल के गीतांजलि चौराहा स्थित कर्मचारी भवन में आयोजित होली मिलन समारोह में दिग्विजय सिंह ने कहा ”यह होली का मौका है, 15 साल हो गए। कोई भूल-चूक हो गई हो तो माफ करना। अगर मैं सांसद बनता हूं तो हर वादा पूरा किया जाएगा। आपको पता है कि दिग्विजय झूठ नहीं बोलता है।” उन्होंने अपने कार्यकाल में कर्मचारियों के हित में उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। कहा कि मेरी सरकार में केंद्र के समान कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया गया और अनुकंपा नियुक्ति भी खूब हुईं।
क्या था मामला
2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान वेतन-भत्तों को लेकर राज्य कर्मचारियों में नाराजगी थी। कर्मचारियों की मांग थी कि राज्य और केंद्र के डीए में 9 फीसदी के अंतर को कम किया जाए। इसके अलावा उन्होंने सरकारी नौकरी को लेकर एक विवादास्पद फार्मूला लागू करने पर भी काम करना शुरू कर दिया था। दिग्विजय के नेतृत्व में तत्कालीन राज्य सरकार ने 28 हजार से ज्यादा दैनिक वेतनभोगियों को नौकरी से हटाने के आदेश निकल दिया था। जब सरकार से इस बाबत सवाल किया गया तो दिग्विजय सिंह ने कहा था कि चुनाव तो प्रबंधन से जीते जाते हैं, कर्मचारी और अन्य वर्गों के वोटों से नहीं। भोपाल लोकसभा में लगभग दो लाख से ज्यादा कर्मचारी और पेंशन वालों के वोट हैं। जिन्हें अपने पाले में करने के लिए हर पार्टी प्रयत्नशील हैं। इसमें सबसे ज्यादा कर्मचारी वोट भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में है। जबकि राज्य में कर्मचारियों के कुल वोट लगभग आठ लाख हैं।
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