
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modiऔर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री Ursula von der Leyenने मंगलवार 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) के संपन्न होने की संयुक्त घोषणा की। यह घोषणा भारत–ईयू आर्थिक संबंधों और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ भारत की व्यापारिक सहभागिता में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाज़ार, पूर्वानुमेयता और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्ध विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करता है। वर्ष 2022 में वार्ताओं के पुनः प्रारंभ होने के बाद गहन चर्चाओं के उपरांत यह समझौता संपन्न हुआ, जो संतुलित, आधुनिक और नियम-आधारित आर्थिक साझेदारी की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूरोपीय संघ भारत का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024–25 में भारत–ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार ₹11.5 लाख करोड़ (136.54 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें ₹6.4 लाख करोड़ (75.85 अरब डॉलर) का निर्यात और ₹5.1 लाख करोड़ (60.68 अरब डॉलर) का आयात शामिल है। सेवाओं का व्यापार वर्ष 2024 में ₹7.2 लाख करोड़ (83.10 अरब डॉलर) रहा।
भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं तथा वैश्विक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। इन दोनों विविध और पूरक अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण अभूतपूर्व व्यापार एवं निवेश अवसरों का सृजन करेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक दृष्टि में एक निर्णायक उपलब्धि है। यह “मेक इन इंडिया” पहल को सुदृढ़ करेगा तथा 99% से अधिक भारतीय निर्यात को अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच प्रदान करेगा।
यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं, व्यापार उपायों, उत्पत्ति के नियम, सीमा शुल्क और व्यापार सुगमता जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ एमएसएमई और डिजिटल व्यापार जैसे उभरते क्षेत्रों को भी शामिल करता है।
वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग वस्तुएँ और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक प्रोत्साहन मिलेगा। लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर 10% तक के शुल्क शून्य हो जाएंगे।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में चरणबद्ध एवं कोटा-आधारित उदारीकरण से “मेक इन इंडिया” और भविष्य के निर्यात को बल मिलेगा। भारतीय उपभोक्ताओं को उन्नत प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा का लाभ प्राप्त होगा।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र—जैसे चाय, कॉफी, मसाले तथाफल एवं सब्जियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। साथ ही डेयरी, अनाज, पोल्ट्री आदि संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
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