
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने शुक्रवार तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली क्षेत्र) और पलवल सेक्शन पर स्वदेशी कवच प्रणाली (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के इंस्टॉलेशन का निरीक्षण किया। चार लाइन वाले इस (35 किमी) सेक्शन में 152 मेन लाइन ट्रैक किलोमीटर हैं। उत्तर रेलवे ने इस कॉरिडोर के पूरे हिस्से में कवच प्रणाली लगाई है, जिसके अंतर्गत प्रमुख स्टेशन यार्ड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम वाली दो मेन लाइनें और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग वाली दो लाइनें शामिल हैं ।

निरीक्षण के दौरान कवच प्रणाली से जुड़े पांच टेस्ट किए गए :
सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) टेस्ट : लोको पायलट ने कवच को टेस्ट करने के लिए रेड सिग्नल पार करने की कोशिश की, कवच सिस्टम ने सिग्नल से पहले ही लोको को रोक दिया।
हेड ऑन कोलिजन टेस्ट : दो लोको को एक ही लाइन पर रखा गया, कवच प्रणाली ने तय दूरी की लिमिट से काफी पहले ही लोको को रोक दिया।
रियर एंड कोलिजन टेस्ट : इस टेस्ट में लोको के पीछे की ओर फिसलने की परस्थिति उत्पन्न की गई, कवच प्रणाली ने पीछे से टक्कर से बचने के लिए लोको को पीछे जाने से रोक दिया।
लूप लाइन ओवरस्पीड टेस्ट : ट्रायल के दौरान, लोको 120 kmph की स्पीड से लूप लाइन में गया, कवच प्रणाली ने स्पीड को 20 kmph तक सीमित कर दिया।
लेवल क्रॉसिंग प्रोटेक्शन टेस्ट : इसमें फाटक खुला होने की परस्थिति उत्पन्न की गई जिसमें कवच प्रणाली ने लोको को फाटक से पहले ही रोक दिया।
अशोक कुमार वर्मा ने कहा, “यह कमीशनिंग भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में से एक पर बड़ा सेफ्टी अपग्रेड है, जो दिल्ली उपनगरीय और लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को कवर करता है। यह सेक्शन पैसेंजर, उपनगरीय और मालगाड़ियों के लिए एक हाई-ट्रैफिक वाला हिस्सा है। इस सेक्शन पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग से ऑपरेशनल सेफ्टी, विश्वसनीयता और पैसेंजर का भरोसा काफी बढ़ गया है।”
कवच एक एडवांस्ड ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत देश में ही बनाया गया है। कवच आपात स्थितियों में रेलगाड़ियों में ब्रेक लगाकर रेल परिचालन को और अधिक सुरक्षित बनाता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिकली सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD), आमने-सामने और पीछे से टक्कर होने के खतरों से बचाता है। इसके अलावा, ओवरस्पीडिंग पर लगातार नज़र रखकर उसे कंट्रोल किया जाता है और कम दृश्यता और खराब मौसम में भी संरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
KAVACH, SIL-4 संरक्षा मानकों के अनुकूल कार्य करने वाला दुनिया में संरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर है। देश में डिज़ाइन किया गया और किफायती सिस्टम होने के कारण, यह आयातित तकनीक पर निर्भरता कम करता है और भारतीय सिग्नलिंग इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देता है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि भारतीय रेलवे धीरे-धीरे KAVACH प्रणाली का विस्तार कर रही है, जिससे लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद रेल परिचालन और सुरक्षित रेल यात्रा के लिए उसकी प्रतिबद्धता और दृढ़ हो रही है।
यह कमीशनिंग सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
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