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बीबीएयू में ‘भारत में खाद्य सुरक्षा और पोषण के अधिकार को आगे बढ़ाना : एक मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य’ संगोष्ठी आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 21 जनवरी को विधि विभाग, विधि अध्ययन विद्यापीठ की ओर से ‘भारत में खाद्य सुरक्षा और पोषण के अधिकार को आगे बढ़ाना: एक मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर मानवाधिकार आयोग की सदस्य श्रीमती विजय भारती सायनी मौजूद रहीं। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के तौर पर विधिक अध्ययन एवं अनुसंधान विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल की अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष प्रो. मोना पुरोहित, विधि अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा एवं कार्यक्रम संयोजक और विधि अध्ययन विद्यापीठ की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा मौजूद रहीं।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने मानवाधिकार जागरूकता, संवैधानिक मूल्यों और नीति-उन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा और पोषण को आगे बढ़ाना एक अंतर्विषयक विषय है।

श्रीमती विजय भारती सायनी ने भोजन को मानव जीवन और गरिमा का मूल तत्व बताया। उन्होंने कहा कि भोजन जीवन को बनाए रखता है, इसलिए इसका नैतिक, सामाजिक और मानवीय महत्व अत्यंत व्यापक है।

प्रो. मोना पुरोहित ने स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी खाद्य सुरक्षा को एक सतत मानवाधिकार चुनौती के रूप में संबोधित किया और संस्थागत प्रयासों एवं जमीनी वास्तविकताओं के बीच की खाई को रेखांकित किया।

अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही डॉ. सूफिया अहमद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर माननीय अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी की स्मारिका (सुवेनियर) का औपचारिक विमोचन किया गया। कार्यक्रम का दूसरा चरण पूर्ण अधिवेशन (प्लेनरी सेशन) के रूप में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य तौर पर प्रो. प्रीति मिश्रा, प्रो. सुनीता मिश्रा एवं चंद्र किशोर, उप आयुक्त (मुख्यालय), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश मौजूद रहे।

संगोष्ठी के तीसरे चरण में तीन तकनीकी सत्र ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के 50 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से 200 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. रुचि सपहिया (एचपीएनएलयू), डॉ. गौरव गुप्ता (इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ) तथा डॉ. पंकज कुमार रावत (इलाहाबाद डिग्री कॉलेज) ने की। सह-अध्यक्षता डॉ. निधि सक्सेना (दिल्ली विश्वविद्यालय), आशीष शाही, नितेश कुमार चतुर्वेदी तथा डॉ. प्रशांत वरुण द्वारा की‌ गयी।

इस अवसर पर विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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