
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने सोमवार लोक निर्माण विभाग के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं दक्षता को विकसित करने हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।
परिवहन मंत्री ने कहा कि लोग यदि अपनी दिनचर्या में सड़क सुरक्षा के नियमों का अनुपालन करें तो सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु के आंकड़ों को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसी प्रकार ’’नो हेलमेट, नो फ्यूल’’ का भी नियम भी सरकार बना चुकी है।

परिवहन मंत्री ने कहा कि एक्सप्रेस-वे पर यूपीडा होल्डिंग एरिया एवं डारमेट्री बनाने पर विचार करें, जिससे कि वाहनों को सुरक्षित खड़ा कराया जा सके। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के पश्चात घायलों को हास्पिटल ले जाने में समय लगता है और एक्सप्रेस-वे पर ट्रामा सेंटर की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए 100 किमी0 की दूरी पर 01-01 ट्रामा सेंटर बनाने पर विचार किया जाए।
अपर मुख्य सचिव परिवहन श्रीमती अर्चना अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए सबसे अधिक सड़क ट्रांसपोर्टेशन का इस्तेमाल किया जाता है। परिवहन निगम लम्बी यात्रा की दूरी वाली बसों में दो ड्राइवर के विकल्प पर काम कर रही है, इससे दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिलेगी।

प्रमुख सचिव, पीडब्लूडी, अजय चौहान ने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं मीडिया के सामूहिक प्रयास से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि चार महत्वपूर्ण बिन्दुओं 04-ई (एजूकेशन, एनफोर्समेंट, इन्जीनियरिंग एवं इमेरजेन्सी केयर) के माध्यम से रोड एक्सीडेंट को मिनिमाइज किया जा सकता है।
परिवहन आयुक्त श्रीमती किंजल सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिवहन विभाग के अधिकारियों को जोड़ने का लक्ष्य है।
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