
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, प्रतापगढ़ / लखनऊ : प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि बीते साढ़े आठ वर्षों से प्रदेश के दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और सम्मानजनक जीवन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने यह बात प्रतापगढ़ जनपद में दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य निधि के अंतर्गत आयोजित ‘दिव्य कला एवं कौशल प्रदर्शनी’ के शुभारंभ अवसर पर कही।
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने दिव्य कला एवं कौशल प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन किया तथा दिव्यांगजनों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया। दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, स्टिल सहित अन्य सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सेवा आश्रम ट्रस्ट एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से इस कार्यक्रम में 150 से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु दो विशेष विश्वविद्यालय डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 6000 दिव्यांग विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मंत्री कश्यप ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 11.5 लाख दिव्यांगजनों को 12,000 रुपए वार्षिक भरण-पोषण राशि प्रदान की जा रही है, जबकि वर्ष 2017 से पूर्व यह राशि मात्र 300 रूपए प्रति माह थी। उप्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिव्यांगजनों की दैनिक आवश्यकताओं को सरल बनाने का कार्य किया है।
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र खोलने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अंतर्गत दुकान संचालन हेतु 10,000 रुपए तथा दुकान निर्माण हेतु 20,000 रूपए की सहायता राशि आसान किस्तों पर उपलब्ध कराई जा रही है।
Suryoday Bharat Suryoday Bharat