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लाड़ली बहनें, किसान या गारंटी की राजनीति, 2028 में क्या आएगा काम : डॉ अतुल मलिकराम

सूर्योदय भारत समाचार सेवा : भारतीय राजनीति इस समय लाभार्थी योजनाओं और गारंटी आधारित राजनीति के दौर से गुजर रही है। चुनावी विमर्श अब केवल विचारधारा, संगठन या भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे इस सवाल पर टिक गया है कि आम नागरिक के जीवन में कौन-सी योजना कितना ठोस, निरंतर और भरोसेमंद लाभ पहुंचा रही है। मध्य प्रदेश इसका सबसे जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान सरकार की ‘लाड़ली बहना योजना’ और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं ने राजनीति की दिशा ही बदल दी। अब, जब 2028 का विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, तो यह सवाल और ज्यादा प्रासंगिक हो गया है कि क्या यही योजनाएं दोबारा निर्णायक साबित होंगी, या कांग्रेस की गारंटी आधारित राजनीति कोई नया करिश्मा करने में सफल हो पाएगी।

मध्य प्रदेश की राजनीति में लाभार्थी योजनाओं का इतिहास पुराना है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने इसे एक नए स्तर पर पहुँचाने का कार्य किया है। लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक चेतना भी प्रदान की है। हर महीने सीधे खाते में आने वाली राशि ने लाखों महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव किया है। यह योजना घर-परिवार के फैसलों से लेकर चुनावी व्यवहार तक में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रही है। यही कारण है कि 2023 में महिला मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा नजर आया।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की गारंटी राजनीति है, जो देश की राजनीति में तेजी से उभरी है। राहुल गांधी की न्याय गारंटी जिसके अंतर्गत महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये, युवाओं के लिए नौकरी गारंटी, किसानों के लिए कर्ज माफी जैसे वादे न केवल सुनने में आकर्षक लगते हैं बल्कि सामाजिक असमानता के मुद्दे को भी सीधे तौर पर संबोधित करते हैं।

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