वॉशिंगटनः अमेरिका में 6 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इसमें सीनेट यानी अमेरिकी संसद के उच्च सदन की 100 में से 35 सीटों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी निचले सदन की सभी 435 सीटों पर सांसद चुने जाएंगे। 35 राज्यों के गवर्नर भी चुने जाने हैं। मध्यावधि चुनावों को राष्ट्रपति के आधे कार्यकाल के प्रदर्शन का नतीजा माना जाता है। अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में जीत जाती है तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दो साल बिना विपक्षी अवरोध के कामकाज कर पाएंगे। हालांकि, पिछले 84 साल में 1934, 1998 और 2002 में ही ऐसा मौका आया जब तत्कालीन राष्ट्रपति की पार्टी को मध्यावधि चुनावों में दोनों सदनों में जीत मिली। 1934 में डेमोक्रेट पार्टी के फ्रेंकलीन रूजवेल्ट प्रेसिडेंट थे।मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में 9-9 सीटें ज्यादा मिलीं। 1998 में डेमोक्रेट बिल क्लिंटन राष्ट्रपति थे। उनकी पार्टी ने हाउस में 5 सीटें ज्यादा जीतीं और सीनेट में सभी सीटें बचा लीं। 2002 में रिपब्लिकन जॉर्ज डब्ल्यू बुश राष्ट्रपति थे। उनकी पार्टी ने हाउस में 8 अौर सीनेट में 2 सीटें ज्यादा जीतीं। अगर हाउस और सीनेट के चुनावों को अलग-अलग देखें तो भी ज्यादातर मौकों पर राष्ट्रपति की पार्टी को हार का ही सामना करना पड़ा। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के निर्वाचन के 21 में से 18 मौकों पर सत्तारूढ़ पार्टी हार गई। वहीं, सीनेट के 21 निर्वाचनों में 15 मौकों पर राष्ट्रपति की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
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