
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार 22 अगस्त को आजादी का अमृत काल समिति की ओर से ‘उद्यमशीलता के माध्यम से विकास’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्व उद्यमिता दिवस को ध्यान में रखकर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि एवं वक्ता के तौर पर समाधान समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष मुकेश कुमार शुक्ला उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर आजादी का अमृत काल एवं एमीनेंट लेक्चर सीरीज की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अर्पित शैलेश उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। उस दौर में घर-घर उद्योग चलते थे और समाज में गरीबी व बेरोजगारी जैसी समस्याएं नहीं थीं। उन्होंने आगे कहा कि यदि हमें 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करना है तो हमें नवाचार, उत्पादन, प्रबंधन, प्रौद्योगिकी और विपणन जैसे क्षेत्रों से जुड़कर उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा।

मुख्य वक्ता मुकेश कुमार शुक्ला ने चर्चा के दौरान विद्यार्थियों को उद्यमिता के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने उद्यमिता की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने ‘ENTREPRENEURSHIP’ शब्द के प्रत्येक अक्षर को एक विशेष गुण से जोड़ा। उनके अनुसार – E का अर्थ Energetic, N का Negotiator, T का Tactical, R का Risk taker, P का Passionate, R का Resilient, E का Ethical, N का Networker, E का Evolving, U का Update और R का Responsible है।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति एवं मुख्य वक्ता द्वारा विद्यार्थियों की ओर से पूछे गये प्रश्नों का उत्तर दिया गया। साथ ही आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं शॉल भेंट करके उनको सम्मानित किया गया। अंत में डॉ. अर्पित शैलेश ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।