हिमाचल: खराब मौसम की मार ने इस बार हिमाचल के सेब बागवानों की कमर तोड़ दी है। पिछले 11 साल बाद इस बार राज्य में सबसे कम सेब का उत्पादन हुआ है। राज्य में वर्ष 2007 में सूखे की मार के कारण 1.76 करोड़ पेटी के आसपास बागवानों ने सेब निकाला था। अमूमन 2.50 करोड़ पेटी उत्पादन करने वाला हिमाचल इस बार मात्र 1.80 करोड़ पेटी सेब ही पैदा कर पाया। इसमें निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों में खरीदा गया सेब भी शामिल है। पिछले साल उत्पादन 2.23 करोड़ पेटी तक रहा।
इस बार पीक सीजन में मौसम की मार और वन भूमि पर अवैध कब्जा किए बगीचों में पेड़ कटने से भी उत्पादन पर विपरीत असर पड़ा है। 2010 में रिकॉर्ड 892.11 हजार टन सेब की पैदावार हुई थी। राज्य के 12 जिलों में से ऊना और हमीरपुर को छोड़कर दस जिलों में सेब की पैदावार होती है। शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी और चंबा में सेब प्रमुख नकदी फसल है। हिमाचल प्रदेश फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि मौसम ने बागवानों का पूरा साथ नहीं दिया। सेब की सेटिंग के समय मौसम ठंडा हो गया। इस कारण फलों की सेटिंग नहीं हुई और सेब की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कम रही। वन भूमि पर अवैध कब्जे करके विकसित किए बगीचों से सेब के पेड़ कटने के कारण भी सेब की पैदावार पर असर पड़ा।
हिमाचल में मौसम ने सेब उत्पादकों का साथ नहीं दिया। सेब की सेटिंग के बाद सेब के पेड़ों में फलों की सेटिंग नहीं हो पाई। इस कारण 1.80 करोड़ पेटी सेब ही पैदा हो पाया। इसमें से 1.66 करोड़ पेटी मंडियों में पहुंचने का रिकॉर्ड बैरियरों में दर्ज है। शेष सेब कोल्ड स्टोरों ने बागवानों से खरीदा है।
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