3 जून, सोमवार को शनि जयंती है। सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर हुआ था। शनि को यम, काल, दु:ख, दारिद्र और मंद कहा जाता है। शनिदेव का नाम आते ही मन किसी अनिष्ट होने की आशंका से घबराने लगता है। ऐसे में शनिदेव को हमेशा प्रसन्न रखने की ही कोशिश करनी चाहिए। शनिदेव प्रसन्न रहें, इसके लिए लोग शनि की पूजा करते हैं। लेकिन कुछ ऐसी बाते हैं जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए ताकि शनि की कुदृष्टि आप पर ना पड़ने पाएं। शनि की पूजा के लिए शास्त्रों में कुछ खास नियम बताए गए हैं।
शनि पूजा की दिशा
शनि की पूजा में दिशा का विशेष महत्व होता है। शनि को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है इसलिए शनि की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपका मुख पश्चिम दिशा की ओर ही होना चाहिए।
काला तिल ही चढ़ाएं
शनिदेव की पूजा में हमेशा काले तिल और खिचड़ी का ही भोग लगाएं। शनिदेव को काला तिल अर्पित करने पर व्यक्ति की कुंडली में अशुभ ग्रहों की छाया दूर हो जाती है।
शनिदेव की आंखों में न देखें
किसी पर भी अगर शनि की दृष्टि पड़ जाती है तो उसकी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में कभी भी शनिदेव की मूर्ति के सामने खड़े होकर पूजा नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूजा के दौरान भूलकर भी शनिदेव की आंखों में नहीं देखना चाहिए।
पूजा में लाल रंग का न करें इस्तेमाल
शनि पूजा में कभी भी भूलकर लाल रंग के फूल या कोई सामाग्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। लाल रंग मंगल का प्रतीक है और मंगल के साथ शनि की शत्रुता है। शनि की पूजा में हमेशा नीले या काले रंग का प्रयोग करना चाहिए।
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