अमेठी। सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी देने वाली योजना मनरेगा फ्लॉप हो गई है। दिव्यांगों तक को मांग के अनुरूप योजना के तहत मजदूरी नहीं मिल रही है। मनरेगा के लिए 764 दिव्यांग पंजीकृत हैं। लेकिन उनमें से महज 74 को ही काम मिल सका है। सरकार दिव्यांगों को सशक्त करने की बात कर रही है, लेकिन जिले में उनका कोई पुरसाहाल नहीं है। वित्तीय वर्ष को छह माह बीत चुके हैं लेकिन सरकारी आंकड़ों में मनरेगा योजना के तहत दिव्यांगों को काम न के बराबर मिल रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 764 दिव्यांगों ने मनरेगा में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। जिनमें सर्वाधिक 179 लोग जामों के हैं, जबकि सबसे कम 15 लोग संग्रामपुर के हैं।
इतनी कम संख्या होने के बावजूद इनको काम नहीं मिल पा रहा है। 150 दिन के आंकड़े बताते हैं कि अब तक सिर्फ 74 दिव्यांगों को काम दिया जा सका है। इनमें से अधिक 16 लोगों को जगदीशपुर में काम दिया गया है। जबकि भादर, भेटुआ व गौरीगंज में महज एक-एक दिव्यांग को काम दिया गया है। जामों व जगदीशपुर के अलावा बाकी सभी 11 ब्लाकों में काम पाने वालों की संख्या दहाई से कम है। मनरेगा के लिए 764 दिव्यांग पंजीकृत हैं। लेकिन उनमें से महज 74 को ही काम मिल सका है। सरकार दिव्यांगों को सशक्त करने की बात कर रही है, लेकिन जिले में उनका कोई पुरसाहाल नहीं है। वित्तीय वर्ष को छह माह बीत चुके हैं लेकिन सरकारी आंकड़ों में मनरेगा योजना के तहत दिव्यांगों को काम न के बराबर मिल रहा है।
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