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यूपी: केंद्रीय नेतृत्व का बड़ा फैसला, सभी दिग्गजों को लड़ाएगी चुनाव, जानें किसे कहां से मिलेगा टिकट

अशाेक यादव, लखनऊ। प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। केंद्रीय नेतृत्व 2022 के विधानसभा चुनाव में बड़े नेताओं को खड़ा करने की योजना बना रहा है। इन दिग्गज नेताओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा समेत प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को चुनाव के मैदान में उतारा जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर या अयोध्या की सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही अन्य दिग्गज भी विधान परिषद सदस्य है और इन सभी का कार्यकाल सितम्बर 2022 तक हैं। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से योजना बनाई गई है कि दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और इसका अन्य विधानसभा सीटों पर भी खासा असर पड़ेगा। माना जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ अपने गृह जिले गोरखपुर या अयोध्या की सीट से चुनाव लड़ेंगे।

इसी तरह केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी की सिराथू सीट से, डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ की कैंट या पश्चिमी सीट से और डॉ. महेंद्र सिंह प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं प्रदेश अध्यक्ष को बुंदेलखंड क्षेत्र की सीट से लड़ाने की तैयारी चल रही है। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 403 में से 300 से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य तय किया है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कौशांबी की सिराथू सीट से चुनाव लड़ेंगे, यह इनके गृह जनपद की सीट है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को लखनऊ की पश्चिमी सीट या कैंट सीट से लड़ाया जा सकता है। पश्चिमी सीट विधायक सुरेश श्रीवास्तव के कोरोना संक्रमण से निधन होने के कारण अभी खाली है। वहीं, कैंट सीट पर भाजपा विधायक सुरेश चंद्र तिवारी है यदि संगठन की ओर से आयु का नियम लागू हुआ तो ऐसे में सुरेश तिवारी को टिकट मिलना मुश्किल होगा।

वहीं, कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को भी प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से मैदान में उतारने की तैयारी है। यहां से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया लगातार पांच बार से निर्दलीय विधायक हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को बुंदेलखंड का मोर्चा दिया जाएगा। माना जाता है कि स्वतंत्रदेव ने बुंदेलखंड में काफी काम किया है। इसका संगठन को लाभ मिल सकता है। योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 18 सितंबर 2017 से वह विधान परिषद सदस्य हैं। इसी तरह केशव प्रसाद मौर्य व डॉ. दिनेश शर्मा ने भी 19 मार्च 2017 को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और दोनों उप मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने सितंबर 2017 से विधान परिषद सदस्य हैं। डॉ. महेंद्र सिंह 2012 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं।

भाजपा ने एमएलसी कोटे से बने कैबिनेट मंत्री को विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारियों में लगने के लिए कह दिया है। इसी बीच अयोध्या से भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अयोध्या में अपनी सीट खाली करने की घोषणा भी कर दी है। उन्होंने कहा कि मैं तो अपनी सीट खाली करने को 2017 से इंतजार में हूं। मैंने तो 2017 में कहा था कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधानसभा या विधान परिषद सदस्य बनना था। यदि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, हम सभी लोगों का बड़ा सौभाग्य होगा।

दिग्गज नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारकर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व कार्यकर्ताओं को संदेश देना चाहता है। माना जा रहा है कि बैक डोर से विधानसभा पहुंचने और मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री व मंत्री बनने से कई स्थानीय नेताओं का उत्साह कम हुआ है। ऐसे में संगठन का मानना है कि दिग्गजों के मैदान में उतरने से स्थानीय राजनीति में गुटबाजी खत्म हो जाएगी। दिग्गज अपने चुनाव के साथ-साथ अन्य विधानसभा के चुनाव में भी कार्यकर्ताओं को जुटाने का काम करेंगे।

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