लंदनः लंदन में हुई एक बैठक के दौरान ब्रिटिश कैबिनेट मंत्रियों की पांच घंटे की लंबी चर्चा के बाद ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर जाने से संबंधित समझौते के प्रस्तावित मसौदे पर मुहर लगा दी गई। बैठक में कैबिनेट ने भविष्य में ब्रिटेन और यूरोपीय देशों के बीच के रिश्तों के संबंध में एक राजनीतिक घोषणापत्र पर भी मुहर लगाई है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के सामने प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि ये एक निर्णायक फ़ैसला है और उन्हें पूरा भरोसा है कि ये देश के हित में है। थेरेसा मे ने कहा कि इस समझौते से देश में नौकरियां बचेंगी और देश की सुरक्षा और संवैधानिक एकजुटता के लिए ये मददगार होगा। इससे ब्रिटेन को अपनी सरहदों और क़ानूनों पर नियंत्रण हासिल होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर विचार करते वक्त मुश्किल सवाल सामने आए, जैसे उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड के बीच की सीमा के संबंधित नियमों से जुड़े सवाल।
हालांकि, इस मसौदे को लेकर प्रधानमंत्री मे को विरोध का भी सामना करना पड़ा है और विपक्षी पार्टियों के कुछ मंत्रियों ने प्रस्तावित मसौदे की आलोचना की है। लेबर पार्टी के मंत्री जेरेमी कॉर्बिन का कहना है, “सदन में ये मामला अधर में लटक सकता है।” इससे पहले ब्रसेल्स में हो रही यूरोपीय संघ में शामिल 27 देशों के राजदूतों की एक अहम बैठक ब्रेक्जिट समझौते के प्रस्तावित मसौदे पर बिना चर्चा किए ही ख़त्म हो गई थी। लेकिन, अब ब्रिटेन सरकार की कैबिनेट के इस फ़ैसले के बाद ब्रेक्जिट पर यूरोपीय संघ के मुख्य मध्यस्थ माइकल बर्नियर ने कहा है कि ये दोनों पक्षों के हित में होगा।
हालांकि, उन्होंने कहा कि 2020 जुलाई तक ऐसा करना संभव नहीं हो पाएगा और इसके लिए समय-सीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी तो हमें बैकअप प्लान को लागू करना होगा। इसका मतलब है कि यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ को ‘एक ही कर क्षेत्र’ के रूप में देखा जाएगा, जहां सीमाओं पर सीमा-शुल्क नहीं लगाए जाएंगे।
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