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सेक्स की ‘सनक’, रिलेशनशिप में किस हद तक सही

सेक्स की लत या ‘सनक’ होना किस हद तक सही है। इस बात को जान लेना चाहिए। हर कोई जानता है कि सेक्स करना जरूरी है। एक व्यस्क को सेक्स करना भी चाहिए। इसके कई फायदे हैं। ये बात भी किसी से छिपी नहीं है। मगर कई बार इसी सेक्स की वजह से बात बिगड़ भी जाती है।

क्योंकि पार्टनर अपनी यौनइच्छा के कारण हद से आगे निकल जाते हैं। सच में जब पानी सिर से ऊपर बहने लगे तो उससे बचना जरूरी है। इसलिए हमें सेक्स की ‘सनक’ को लेकर जानकारी होनी चाहिए। तब जाकर हेल्दी सेक्स लाइफ जी सकते हैं।

यहां पर सेक्स की लत और सेक्स की आदत दोनों ही बातों को समझना होगा। अगर सेक्स की इच्छा पर आपका काबू है यानी आप सेक्स करने का मन होने पर पार्टनर के मना करने पर खुद को रोक लेते हैं। तब आप सेक्स की जब्त में नहीं हैं और यदि आप सेक्स की इच्छा होने पर उसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं तब ये संकेत ठीक नहीं।

हालांकि सेक्स की लत और सेक्स की आदत तक बात समझ आ गई। मगर कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी यौन इच्छा नहीं होती। वे ऐसे में खुद को सौभाग्यशाली न मानें। क्योंकि यौनइच्छा का न होना एक बीमारी है। इसलिए अगर आपको सेक्स की इच्छा ही नहीं होती तो इसका इलाज करना पड़ेगा।

मगर देखिए आदमी के लिए सेक्स की ‘सनक’ कितनी हद तक सही है।

एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी मनचंदा कहती हैं, सेक्स एडिक्शन एक गंभीर मनोरोग है। इस मनोरोग का मरीज अपनी सेक्स की इच्छा / सेक्शुअल नीड्स पर नियंत्रण नहीं कर पाता है। वह चाहकर भी इस कामेच्छा से अपने मन को नहीं हटा पाता है। इस बीमारी को चुनिंदा गंभीर मनोरोग की श्रेणी में रखा गया है।

मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक सेक्स की लत के बारे में पता लगाने के लिए मरीज के साथ कई-कई मीटिंग करते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं जो सेक्स एडिक्शन के अधिकतर मरीज में देखने को मिलते हैं- 

  • सेक्स करने की तीव्र इच्छा
  • सेक्स करने के बाद भी अधूरापन
  • अपनी पार्टनर से हमेशा नाखुश
  • बहुत लोगों के साथ अफेयर होना
  • वन नाइट स्टैंड करना
  • सेक्शुअल पार्टनर बनाना
  • दिन में कई घंटे पोर्न देखना
  • साइबर सेक्स
  • सेक्स करने की इच्छा पर से नियंत्रण खो देना
  • सेक्स न कर पाने पर डिप्रेशन में चले जाना

एनबीटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी व्यक्ति को यौन संबंध बनाने की लत को विश्व स्वास्थ्य संगठन / डब्ल्यूएचओ मानसिक विकार नहीं मानता था। हालांकि, आगामी साल 2022 में एक नया आईसीडी-11 जारी होगा जिसमें सेक्स की लत को अलग तरह से दिखाया जाएगा।

इस नए नियम के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपनी सेक्स की लत पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। यदि इससे वह अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है तो इसे ‘कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर डिसऑर्डर’ माना जा सकता है।

सेक्स की लत या सनक वाले लोगों की कहानी सुनने के बाद कोई भी ऐसे शख्स के साथ रिलेशनशिप में नहीं रहना पसंद करेगा। सेक्स कभी भी दो लोगों के बीच सहमति और प्यार से होने वाली प्रक्रिया है। इसको लेकर हिंसक या अब्यूसिव होना गलत है। एक हेल्दी रिलेशनशिप में सेक्स की ‘सनक’ नहीं होनी चाहिए।

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