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सच तो यह है कि गाँधी और शास्त्री दोनों को ही हम उनकी जयंती पर रस्मी तौर पर याद करते हैं

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को देश उनकी जयंती पर एक बार फिर श्रद्धा से याद करेगा और उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराएगा। दोनों महापुरुषों की जयंती एक ही दिन दो अक्टूबर को आती है। इस दिन बिना भेदभाव के समस्त देशवासी उन्हें नमन करते हैं। प्रार्थना सभा, प्रभात फेरी भजन, सभा और गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। दोनों में एक समानता है। दोनों ही देश के लिए जिए और शहीद हुए। गाँधी जी को राजघाट पर गोली मारी गयी और शास्त्री जी की मास्को में रहस्यमयी तरीके से मृत्यु हुई।

सच तो यह है कि गाँधी और शास्त्री दोनों को ही हम उनकी जयंती पर रस्मी तौर पर याद करते हैं। कसमें खाते हैं उनके पदचिन्हों पर चलने की मगर हमारा आचरण एकदम विपरीत होता है। आज सम्पूर्ण विश्व में अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। अब यह भी कागजी हो गया है। कश्मीर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है और पाकिस्तान युद्ध पर उतारू है ऐसे में अहिंसा की बातें बेमानी हो गयी हैं। अब सवाल यह उठता है कि बड़ी-बड़ी बातें छोड़ कर आखिर क्या किया जाये कि दोनों महापुरुषों की जयंती भी मने और लोग हम पर थू-थू भी नहीं करें। रास्ता तो आखिर हमें ही निकालना होगा। देश को आजाद हुए सत्तर साल हो गये हैं और गरीबी, बेराजगारी और भुखमरी बजाय घटने के बढ़ती ही जा रही है। पंचवर्षीय योजनाओं के जरिये हमने विकास और प्रगति तो खूब कर ली मगर देशवाशियों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान का इंतजाम नहीं कर पाये। क्या कारण है की गरीब अधिक गरीब होता गया और अमीर की अमीरी लगातार बढ़ती ही गयी। यह समय जयंती मनाने का नहीं अपितु चिंतन और मनन का है। हमें अपनी सोच बदलनी होगी और देश की दशा, दिशा को जनोन्मुखी बनानी होगा तभी गाँधी, शास्त्री के सपनों का भारत साकार होगा।
2 अक्टूबर का दिन भारत के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि आज के दिन भारत के दो ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया जिन्होंने देश को नया जन्म और नई पहचान दी है। भारत को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी गर्व और भावुक होकर देश याद कर रहा है। सादा जीवन और उच्च विचार कहने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल पा सकता है।
महात्मा गांधी त्याग और बलिदान की मूर्ति थे। सादा जीवन और उच्च विचार उनका आदर्श था और वे भारतीय जनमानस में सदैव प्रेरणा के स्त्रोत रहेंगे। अहिंसा और सादगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व के प्रमुख अलंकार थे। उनके ये दोनों गुण आज भी आमजन को एक गौरवशाली जीवन की प्रेरणा देते हैं।
आज का दिन बड़ा ही महत्वपूर्ण है क्योंकि आज पूरे विश्व में गांधी जी कि प्रेरणा से ही अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री एक महान नेता थे। इन दोनों नेताओं ने अपने जीवन में कई आदर्श स्थापित किए हैं। एक गांधी जी थे जिन्होंने सत्य ओर अहिंसा का पाठ पढ़ाया, आत्मविश्वास ओर आत्मनिर्भरता से जीना सिखाया। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री सादगी के प्रतिमूर्ति थे। आज के दिन हमें उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। दोनों महान विभूतियों की प्रेरणादायक जीवन गाथा देश और दुनिया के लिए अनमोल धरोहर हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सादगी, सच्चाई और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश की आजादी के आंदोलन में अपनी ऐतिहासिक और निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने देश को स्वावलम्बन के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी और ग्राम स्वराज के साथ−साथ सुशासन और सुराज का भी मार्ग दिखाया। शास्त्री जी ने युद्ध के कठिन हालात में देश का नेतृत्व संभाला और देशवासियों को जय जवान−जय किसान का प्रेरणादायक नारा देकर जवानों और किसानों का हौसला बढ़ाते हुए देश के सभी नागरिकों में राष्ट्रीयता का संचार किया। आज जबकि देश और दुनिया में नक्सलवाद, आतंकवाद, युद्ध, हिंसा और प्रतिहिंसा के बादल मंडरा रहे हैं, तब ऐसे कठिन दौर में गांधी जी और शास्त्री जी के आदर्श और सिद्धांत सबके लिए और भी ज्यादा प्रासंगिक हो।
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