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क्योंकि “लाश “परेशान नहीं करती और न ही करवट बदलती है

लखनऊ / धर्मेंद्र सिंह:अभी तक आपने दिल्ली की सर्दी और दिल्ली की चकाचोंध भरी जिंदगी को ही एन्जॉय किया है. लेकिन आज हम आपको उस चमकती दमकती दिल्ली की एक काली तस्वीर दिखाने की कोशिश करेगें जिसने दिल्ली के रईशजादों और दिल्ली सरकार की पोल खोलकर रख दी है। इस काली तस्वीर को देश की जानी पहचानी सामाजिक संस्था के संस्थापक अंशु गुप्ता ने केबीसी के 15 सितम्बर वाले एपिसोड में बयान कर वहां उपस्थित ऑडियंश की आंखें नाम कर दीं।

 

दरअसल अंशु गुप्ता सामाजिक संस्था “गूँज “के गूँज हैं .गूँज इस समय देश के 22 राज्यों में गरीबों और निरीह लोगों की जिंदगी में खुशियां भरने का काम कर रही है। “गूँज” का उद्भव एक 5 साल की फुटपाथी लड़की के एक लाइन के मार्मिक वाक्य की बजह से हुआ। अंशु बताते हैं कि वह उन दिनों दिल्ली में एक स्टोरी के सिलसिले में रात के समय फुटपाथ के लोगों से बातचीत कर रहे थे। तभी अचानक एक हबीब नाम के आदमी पर उनकी नजर टिक गयी जो एक लाश को रिकशे पर लादकर ले जा रहा था ,जब मैंने हबीब को रोककर लाश के बारे में पूछा तो हबीब ने कहा बाबू !इस लाश की बजह से में और मेरी बच्ची शाम को एक बक्त का रूखा सूखा खाना खाकर अपनी फुटपाथी जिंदगी को जैसे तैसे खींच रहे हैं ,मेरी उत्सुकता और अधिक बढ़ी मैंने वहां से तीन चाय ली और बात करने बैठ गया। चाय पीते हुयी उस 5 साल की बच्ची ने मुझे ऐसा झकझोरा कि उसने मुझे क्या, जैसे समूचे दिल्ली वालों की औकात खोलकर रख दी हो। बच्ची बोली साहब !दिल्ली की सर्दी में लाशें ही हमरे “कम्बल” का काम करती हैं. रात को मैं लाश से चिपक कर ही सो जाती हूँ जिससे मुझे सर्दी नहीं लगती और हाँ साहब !एक बात और लाशें किसी को भी परेशान नहीं करती , न ही करवट बदलती हैं जिसकी बजह से मैं पूरी रात गर्मी के अहसास के साथ सोती रहती हूँ। मेरे आँखों से आंसुओं की धार बही जा रही थी। मेरे अंदर की आत्मा ने मुझे इतना झकझोरा की मैं सारी रात सो नहीं सका। बच्ची के बाद उसका पिता हबीब बोलै साब चलें अब समय नहीं है क्योंकि इस समय मेरा धंधा और अधिक बढ़ जाता है जैसे जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे ही दिल्ली में फुटपाथियों की मौतों में इजाफा होना शुरू हो जाता है। हबीब ने ये भी बताया कि उसको लावारिश लाशों को ठिकाने लगाने के लिए 20 रूपये और 2 मीटर कफ़न का कपडा ही मिलता है. जिससे उसका गुजारा चलता है। बस यहीं से मेरी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया और “गूँज “की स्थापना कर दी। अंशु ने केबीसी में बताया कि वह लोगों के बेकार पड़े कपड़ों अदि सामग्री को लेते हैं और उसको अपडेट कर नया बनाकर बाढ़ पीड़ितों और आपदाओं से ग्रसित जरूरतमंदों को ये कपडे दे देते हैं. इस समय अंशु की गूँज देश के 22 राज्यों में धूम मचाये हुए हैं।

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