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भारत-चीन के बीच जंग, ड्रैगन ने बॉर्डर पर मंगाया हजारों टन हथियार

नई दिल्ली। बीते एक महीने से भारत और चीन के बीच चल रहा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दोनों ही देश इस बार पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। डोकलाम को लेकर भारत के साथ जारी तनातनी के बीच चीन ने तिब्बत में दो सैन्य अभ्यासों के बहाने अपने हजारों टन सैन्य साजोसामान इन पठारों की तरफ भेजे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि सैन्य तैनाती में यह इजाफा सिक्किम सीमा के पास नहीं, बल्कि पश्चिम में शिनजियांग प्रांत के निकट उत्तरी तिब्बत में किया गया है। हालांकि यहां गौर करने वाली बात यह है कि बीजिंग यादोंग से लेकर ल्हासा तक फैले अपने रेल और सड़क नेटवर्क के जरिये इन सैन्य साजोसामान को सिक्किम सीमा के निकट नाथू-ला तक पहुंचा सकता है।

चीनी सेना को अपने एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिये करीब 700 किलोमीटर की यह दूरी तय करने में महज छह से सात घंटे का वक्त लगेगा।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने चीनी सेना के मुखपत्र पीएलए डेली के हवाले से लिखा है, ‘अशांत तिब्बत और शिनजियांग प्रांत में पश्चिमी थिएटर कमांड ने उत्तरी तिब्बत में कुनलुन पर्वतों के दक्षिण में सैन्य साजोसामान भेजे हैं।’ हालांकि पीएलए डेली ने यह कहीं नहीं बताया है कि साजोसामान की यह तैनाती उसके दो सैन्य अभ्यासों के लिए है।

वहीं संघाई स्थित सैन्य टिप्पणीकार नी लेशियॉन्ग ने इस बावत बातचीत में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि यह सैन्य मूवमेंट ‘सीमा तनाव से जुड़ा हुआ और भारत को बातचीत की मेज़ पर लाने के लिए डिजाइन किया गया प्रतीत होता है।’ अखबार ने उनके हवाले से लिखा है, ‘कूटनीतिक वार्ताओं को पीछे से सैन्य तैयारियों का साथ दिया जाना चाहिए।’

वहीं एक अन्य सैन्य टिप्पणीकार झू चेंमिंग ने अखबार कहा, ‘पीएलए (चीनी सेना) यह दिखाना चाहती है कि वह अपने पड़ोसी भारत को आसानी से हरा सकता है।’ हालांकि दक्षिण एशिया के रणनीतिक विशेषज्ञ वांग देहुआ ने इसी अखबार से बातचीत में कहा कि ‘यह सैन्य ऑपेरशन पूरी तरह से साजोसामान को लेकर है’ और अभी तिब्बती इलाके में काफी बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मौजूद है।

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