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‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के स्टेट को-ऑर्डिनेटर सूर्यप्रताप मिश्रा के नेतृत्व में चला अभियान, लखनऊ से एक सप्ताह में रेस्क्यू हुए 65 बाल श्रमिक

अशाेक यादव, लखनऊ। सरकार भले ही बच्चों में ज्ञान की अलख जगाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, पर प्रदेश की राजधानी में बच्चों को शिक्षित बनाने की बजाय कच्ची उम्र में ही मेहनत की भट्ठी में झोंका जा रहा है। शहर में बाल श्रम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के निर्देश पर ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ संस्था की ओर से राज्य समन्वयक सह एनसीपीसीआर प्रतिनिधि सूर्यप्रताप मिश्रा के नेतृत्व में एक सप्ताह में लखनऊ से 65 बाल श्रमिकों को रेस्क्यू कराया गया है।

सूर्यप्रताप मिश्रा ने बताया कि विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस (12 जून) के मौके पर एनसीपीसीआर के निर्देश पर श्रम विभाग और पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में 15 से 21 जून तक बाल श्रम के खिलाफ लखनऊ में विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसके तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी की गई।

छापेमारी के दौरान शहर के कई होटलों, बाइक-कार मैकेनिक दुकानों, ढाबों, ठेलों आदि में 14 साल से कम उम्र के किशोर काम करते हुए पाये गये। एक सप्ताह के इस अभियान के दौरान कुल 65 बाल श्रमिकों को रेस्क्यू कराया गया। 17, 18 व 19 जून को बच्चों का मेडिकल न हो पाने के कारण अभियान संचालित नहीं हो सका।

नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी की तैयारी

सूर्यप्रताप मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल नीति-2013 के अनुसार बचे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। बाल श्रम (निषेध व नियमन) कानून, 1986 के तहत 14 साल या इससे कम उम्र के बच्चों को नियोजन कर श्रम कराना दंडनीय अपराध है।

इसके तहत 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या 06 माह से दो साल तक का कारावास या दोनों हो सकते हैं। इस नियम के तहत अभियान के दौरान जिन दुकानों पर बच्चों को बाल श्रम करते पाया गया, उन दुकान मालिकों व नियोजकों के खिलाफ जल्द प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

बाल श्रम से तैयार वस्तुओं का उपयोग न करें

एनसीपीसीआर प्रतिनिधि सूर्य प्रताप मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय बाल नीति-2013 के अनुसार बचे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। ऐसे में बाल श्रम सिर्फ कानूनी ही नहीं सामाजिक अपराध भी है। बचपन बचाओ आंदोलन संस्था की अपील है कि दुकानों, ढाबों, होटलों आदि में जिन वस्तुओं का निर्माण बाल श्रमिकों द्वारा किया जा रहा है।

उन वस्तुओं का इस्तेमाल बंद कर दें, ताकि बच्चों को बालश्रम के चंगुल से निकालकर मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ा जा सके और शिक्षित किया जा सके।

बाल श्रमिकों को मुक्त कराने पहुंची टीम को व्यापार मंडल ने घेरा

अभियान के अंतिम दिन मंगलवार को बचपन बचाओ आंदोलन की टीम जब पुलिस बल के साथ नाका बाजार में पहुंची तो कई बच्चों को होटलों, दुकानों आदि में काम करते पाया। जैसे ही टीम बच्चों को रेस्क्यू करके निकलने लगी। व्यापारियों ने उन्हें घेर लिया।

सूर्य प्रताप मिश्रा ने बताया कि नाका व्यापार मंडल के एक क्षेत्रीय नेता के नेतृत्व में करीब 40-50 लोगों ने टीम का घेराव करते हुए बच्चों को ले जाने से रोकने का प्रयास किया, हालांकि टीम के साथ में पुलिस बल भी मौजूद था। क्षेत्रीय थाना से अतिरिक्त बल मंगाना पड़ा, इसके बाद बच्चों को रेस्क्यू करके वहां से निकाला जा सका। सूर्य प्रताप ने बताया कि रेस्क्यू किये गये बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लाभ पहुंचाते हुए शिक्षित किया जाएगा।

अभियान के दौरान बाल श्रमिक हुए मुक्त –

दिनांक – कितने बच्चे कराए गए मुक्त

  • 15 जून – 21
  • 16 जून – 18
  • 20 जून – 20
  • 21 जून – 06

कुल – 65

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