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गोरखपुर हत्याकांड में कांग्रेसियों ने विरोध कर माँगा त्याग पत्र

लखनऊ: गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में लगभग 70 बच्चों की आक्सीजन की कमी से हुई दर्दनाक मौतों के विरोध में प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगने के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा आज जीपीओ पार्क स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष विशाल धरने का आयेाजन किया गया। धरने का नेतृत्व महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष सुशीला शर्मा, युवा कांग्रेस मध्य जोन के अध्यक्ष अंकित परिहार, एनएसयूआई के मध्य जोन के अध्यक्ष मयंक तिवारी, अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन हाजी सिराज मेंहदी, नदीम अशरफ जायसी, रमेश श्रीवास्तव, पूर्व मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी एवं सेवादल के मुख्य संगठक डा0 प्रमोद पाण्डेय ने किया।प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता वीरेन्द्र मदान ने बताया कि धरने के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर विधायक अराधना मिश्रा‘मोना’, विधायक राकेश प्रताप सिंह, लखनऊ जिला कंाग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव चौधरी एवं शहर अध्यक्ष बोधलाल शुक्ला एड. ने माल्यार्पण किया।धरने में मौजूद प्रदेश कंाग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर सांसद ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बच्चों की मौत पर गोरखपुर में खुलेआम झूठ बोला है और जिन झूठी बातों को बोला है उसका पर्दाफाश करने के लिए कांग्रेसजन विधानसभा जाकर मुख्यमंत्री का कार्यालय घेरकर इस्तीफा देने के लिए बाध्य करेंगे। उन्होने कहा कि बच्चों की मौत होते ही मुख्यमंत्री का एक तरफ यह कह देना कि आक्सीजन की कमी से मौतें नहीं हुई हैं लेकिन इसकी जांच करायी जायेगी, ऐसा क्यों? आक्सीजन से मौत नहीं हुई तो आक्सीजन वेंडर के यहां रात्रि में छापा क्यों? जबकि डीएम ने रिपोर्ट दी थी कि आक्सीजन की कमी थी। फरवरी से लेकर 9 अगस्त तक पुष्पा एजेंसी ने 17 पत्र लिखे जिसमंे हर पत्र की प्रतिलिपि सूचनार्थ प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, स्वास्थ्य मंत्री एवं मुख्य सचिव तक को भेजा।

जबकि आपने एक प्राचार्य, वरिष्ठ डाक्टर राजीव मिश्रा को निलम्बित कर दिया। उसका गुनाह क्या है? आपने इतने पत्रों के बाद पैसा 5 अगस्त को रिलीज किया, 7 अगस्त को राजकीय कोषागार में पहुंचा। 8 अगस्त को अवकाश था। 9 व 10 अगस्त को स्वयं योगी जी आप वहां पर थे। प्रिंसिपल और सारा अस्पताल आपकी आवभगत में लग गया। 11अगस्त को पैसा रिलीज किया गया। गुनहगार कौन है? एक और प्रभारी डाक्टर को आपने हटा दिया और इल्जाम लगाया कि डाक्टर प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं। आप स्वयं यहां से कई वर्षों से सांसद हैं आपको अपने क्षेत्र के भूगोल का एवं सामाजिक ताने-बाने का ज्ञान नहीं है, इसका मतलब न आपको समझ है और न समझदारी और न ही प्रशासनिक ज्ञान है। जांच रिपोर्ट आने के पहले ही मुख्यमंत्री का यह कहना कि मौतें इंसेफेलाइटिस से हुई है इससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री जांच को प्रभावित कर रहे हैं। बच्चों की मौत के 36घंटे बाद मुख्यमंत्री का संवेदना व्यक्त करना यह प्रकट करता है कि वह खुद अतिसंवेदनहीन हैं। इन मौतों की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और प्रदेश सरकार के मुखिया की है। अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकारियों एवं डाक्टरों पर गाज गिरायी जा रही है।उन्होने कहा कि जापानी इंसेफेलाइटिस की बीमारी के इलाज के सम्बन्ध में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झूठ बोल रहे हैं। गुलाम नबी आजाद ने राजबब्बर को बताया कि सांसद के रूप में उनसे योगी आदित्य नाथ इन समस्याओं को लेकर कभी नहीं मिले। यूपीए सरकार में 2004 से 2014 के दौरान कितनी बार केन्द्र के स्वास्थ्य मंत्री या जिम्मेदार अधिकारी, राज्यमंत्री, डीजी हेल्थ या स्वास्थ्य सचिव से कितनी बार और कब मिले? इसे सार्वजनिक करें। पूर्व प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने गोरखपुर के लिए योजना बनाई। एम्स व बीआरडी मेडिकल कालेज को सुपर स्पेशियालिटी हास्पिटल बनाने के लिए डेढ़ सौ करोड़ रूपये दिया एवं मेडिकल कालेज में ही आधुनिकतम टेक्नालॉजी एवं सुविधाओं से लैस सौ बेड का इंसेफेलाइटिस वार्ड बच्चों के लिए दिया। अन्य सुविधाओं के लिए यूपीए सरकार द्वारा साढ़े चार हजार करोड़ रूपये प्रदान किये गये। जापानी तकनीक लाने एवं मदद करने के लिए सचिव स्वास्थ्य, डीजी हेल्थ, वैज्ञानिकों, आर एण्ड डी आदि 17 कमेटियां गयीं। योगी यह बतायें इन 17 कमेटियों में कितनी कमेटियों से वह मिले? लड़ाई वो किससे लड़ रहे हैं? बीमारी से या बच्चों केा इस रोग से मुक्त या पूर्वांचल को इंसेफेलाइटिस बीमारी से मुक्त कराने के लिए?धरने को सम्बोधित करते हुए पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि कंाग्रेस पार्टी योगी का इस्तीफा क्यों मांग रही है क्योंकि योगी आदित्य नाथ जबसे लोकसभा के सदस्य बने हैं इंसेफेलाइटिस की बीमारी के बारे में बयानबाजी करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का त्यागपत्र मांगते रहे हैं और अब जब स्वयं मुख्यमंत्री हैं तो यही बात खुद पर लागू क्यों नहीं करते हैं। दायें-बायें टालने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?धरने को विधायक अराधना मिश्रा मोना, रामकृष्ण द्विवेदी,आजाद कुमार कर्दम, सिराज मेंहदी, नदीम अशरफ जायसी, रमेश श्रीवास्तव, अंकित परिवार, मयंक तिवारी, नरेश बाल्मीकि ने भी सम्बोधित किया।इसके उपरान्त धरने में शामिल सभी कांग्रेसजनों ने गांधी प्रतिमा से विधानसभा की ओर कूच किया जहां विधानसभा से पहले पुलिस प्रशासन द्वारा जबर्दस्त बैरीकेडिंग कर रोका गया जहां अहिंसात्मक ढंग से राजबब्बर सहित सभी कांग्रेसजन सड़क पर ही धरने पर बैठ गये और मुख्यमंत्री के झूठ का पर्दाफाश करते हुए इस्तीफे की मांग करने लगे। लगभग दो-ढाई घण्टे तक सड़क पर धरने के बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए गिरफ्तार कर सभी कांग्रेसजनों को बसों में भरकर गोसाईंगज थाने ले गयी और काफी देर बाद रिहा किया गया।

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