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खुलासा !कालेधन पर सरकार का हुआ “मुँह काला”

लखनऊ :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किस्मत चमकाने वाली सुनहरी स्कीम “नोटबंदी और कालाधन “बुरी तरह फ़ैल हो गयी. हालाँकि सरकार ने तमाम ऐसे प्रयाश किये कि जनता के सामने कालाधन और नोटबंदी के सही आंकड़े देने की बजाय दिग्भ्रमित करने वाले आंकड़े दिए जाएँ लेकिन भला हो आरबीआई का, जिसने बिना किसी दबाव के सही आंकड़े प्रस्तुतु कर देश की उस जनता की आँखें खोल दी. जिसने 8 नवम्बर की आधी रात की घोसणा को अपने अच्छे दिनों की शुरुआत के संकेत के रूप में लिया था। बैंकों में अपनी गाढ़ी कमाई जमा करने में आम जनता ने अपनों को भी खोकर सिर्फ इसलिए ढांढस बनाये रखा कि देश में एक नयी “आर्थिक क्रांति” आएगी और गरीब -अमीर के बीच की खायी कुछ कम होगी। लेकिन अफ़सोस !प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये स्कीम भी हवा हवाई साबित हुयी है। जनता को एक बार फिर सब्जबाग दिखाकर छलने का काम किया है। जनता इस छल का जबाब जरूर देगी।

 

आरबीआई ने जो ताजा आंकड़ें जारी किये हैं उसने मोदी सरकार की काळा धन और नोटबंदी को बुरी तरह असफल साबित किया है।

क्या हैं आरबीआई के आंकड़े
रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया है कि नोटबंदी के दौरान सिस्टम का 99 फीसदी पैसा वापस आ गया. सीधे शब्दों में समझे तो 500 और 1000 रुपए का नोट बैन करने बाद सिस्टम में 15.44 लाख करोड़ रुपए थे. सरकार का दावा था कि कम से कम 5 फीसदी रकम वापस नहीं लौटेगा. इस तरह ब्लैक मनी सिस्टम से बाहर हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 1 फीसदी रकम भी सिस्टम में वापस नहीं आ पाया है.
हालांकि आरबीआई की रिपोर्ट में एक हैरतअंगेज खुलासा यह है कि नोटबंदी के बाद 8.90 करोड़ यूनिट 1000 रुपए के नोट यानी 8900 करोड़ रुपए सिस्टम में वापस नहीं आए हैं.
आरबीआई की यह रिपोर्ट यह साबित करने के लिए काफी है कि नोटबंदी का काले धन के खेल पर कोई असर नहीं पड़ा है.
आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब सिस्टम का बड़ा हिस्सा वापस आना ही था तो नोटबंदी जैसा कदम क्यों उठाया गया.

अपने ही बातों पर घिरी सरकार

विपक्ष एकबार फिर इस मुद्दे को हवा देने में लगा लेकिन फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली सरकार इस कदम को सही करार देने की पूरी कोशिश कर रही है. जेटली ने कहा, ‘नोटबंदी का मकसद नोटों को जब्त करना नहीं बल्कि काले धन को सिस्टम में लाना था.’ यह कहकर जेटली अपने ही पीएम की उस बात को झूठ करार दे रहे हैं. 15 अगस्त के भाषण में पीएम ने कहा था, ‘नोटबंदी की वजह से कम से कम 3 लाख करोड़ रुपए की ब्लैक मनी बैंकिंग सिस्टम में आ गए हैं.’ आरबीआई का फाइनेंशियल ईयर जुलाई से जून तक चलता है.
आरबीआई की रिपोर्ट आने के बाद सरकार अपनी ही बातों में घिर गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी चिदंबरम ने कहा, ’99 फीसदी नोट सिस्टम में वापस आ गए, क्या नोटबंदी काले धन को सफेद बनाने का जरिया था.’ चिदंबरम ने ट्वीट करके सरकार को घेर लिया है. उन्होंने कहा, ‘1544000 करोड़ रुपए में से नोटबंदी के बाद 16,000 करोड़ रुपए वापस आए. यह सिर्फ 1 फीसदी है. इसके बदले आरबीआई ने 21,000 करोड़ रुपए वैल्यू के नोट छाप दिए. आरबीआई को इस पर शर्म करनी चाहिए.’

हालांकि अरुण जेटली की तरह कुछ एक्सपर्ट भी चिदंबरम की बातों से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि अभी भले ही नोटबंदी का असर नजर ना आ रहा हो. लेकिन कुछ समय के बाद इसका असर दिखेगा. फिलहाल इसका असर टैक्स कलेक्शन पर दिखेगा. यानी कुल मिलाकर सरकार को अपनी कोशिशों के बदले सांत्वना पुरस्कार ही मिला.

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