
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को नया आयाम देने पर व्यापक चर्चा की गई। इस सहयोग का फोकस वेलनेस टूरिज्म, खेल पर्यटन (विशेषकर गोल्फ), व्यंजन एवं खानपान का आदान-प्रदान, बौद्ध पर्यटन, सांस्कृतिक यात्रा तथा साहित्य और ज्ञान आधारित पर्यटन पर रहेगा। यह विमर्श यामानाशी प्रांत से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय बैठक के दौरान हुआ, जिसकी अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने की।
लखनऊ के एक स्थानीय होटल में बैठक के दौरान जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और जापान के बीच संस्कृति एक ऐसा सेतु है, जो दोनों देशों को जोड़ता है। मंत्री ने कहा कि जापान ने 1868 से अपने आधुनिक विकास की यात्रा शुरू की थी।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जापान की जीवन-दर्शन परंपराओं का उल्लेख करते हुए ‘इकिगाई’, ‘वाबी-साबी’, ‘ज़ेन’ और ‘ज़ाज़ेन’ जैसी अवधारणाओं की चर्चा की। सारनाथ और कुशीनगर में जापानी बौद्ध संस्थानों का होना भारत-जापान के बीच दशकों से चले आ रहे आध्यात्मिक संबंधों का प्रमाण है।
यामानाशी प्रांत के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने कहा, कि दिसंबर 2024 में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद से उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच सार्थक संवाद हुए हैं। यामानाशी प्रांत, जापान में उत्तर प्रदेश के लिए प्रवेश द्वार (गेटवे) के रूप में कार्य करने का लक्ष्य रखता है।
बैठक में विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद संस्कृति विभाग की अपर निदेशक डॉ. सृष्टि धवन ने भी प्रस्तुतीकरण दिया।
कार्यक्रम में यामानाशी प्रांत के सलाहकार नीरेंद्र उपाध्याय, महानिदेशक पर्यटन डॉ. वेदपति मिश्रा, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक इको पुष्प कुमार के०, उप निदेशक पर्यटन कीर्ति, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य तथा दोनों देशों के टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स उपस्थित रहे।
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