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भाजपा का अहंकारी नेतृत्‍व अब अपने कार्यकर्ताओं की ही सुनने को तैयार नहीं

लखनऊ / मनोज श्रीवास्‍तव : भाजपा राज में पुलिस इतनी ताकतवर हो गई है कि वह पार्टी के कार्यकर्ताओं तक को नहीं बख्‍श रही है। अब आलम यह हो गया है कि पुलिस-प्रशासन के भाजपाईयों से दोयम दर्जे के व्‍यवहार से अब उन्‍हें अपनी ही सरकार में धरना देने और अनशन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब तक अपनी सरकार में विभिन्‍न मामलों को लेकर आधा दर्जन से ज्‍यादा विधायक धरना दे चुके हैं।

 

अहंकारी नेतृत्‍व अब अपने कार्यकर्ताओं की ही सुनने को तैयार नहीं है। अवैध खनन को लेकर बांदा की नरैली सीट से भाजपा विधायक राजकरन कबीर धरने पर बैठ गए थे। बलिया जिले की बौरिया सीट से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह को दोकटी थाने की पुलिस की अवैध वसूली के खिलाफ धरना पर बैठना पड़ा। अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ सुरेंद्र सिंह मानव श्रृंखला भी बना चुके हैं।                           भाजपा कार्यकर्ता से बदसलूकी और मारपीट के मामले में कार्रवाई न होने पर रायबरेली के सलोन सीट से विधायक एवं पूर्व मंत्री दल बहादुर कोरी को सलोन कोतवाली में धरना देना पड़ा। लखीमपुर खीरी से भाजपा विधायक योगेश वर्मा को खनन माफियाओं को संरक्षण देने के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। कार्यकर्ता से बदसलूकी करने पर भदोही के औराई से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्‍कर जिलाध्‍यक्ष हौंसिला प्रसाद पाठक के साथ एसपी कार्यालय पर धरना पर बैठ गए। इसी तरह सीतापुर सदर से भाजपा विधायक राकेश राठौर को एक एफआईआर दर्ज कराने के लिए धरने पर बैठना पड़ा।                                                                                                                 हरदोई जिले के संडीला से भाजपा विधायक राजकुमार अग्रवाल राजिया कोतवाली पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। फिरोजाबाद के शिकोहाबाद से भाजपा विधायक मुकेश वर्मा {सरकार बनते ही इनकी सगी भांजी ने इन पर लगतार बलात्कार की बात कही थी और एक दूसरे प्रकरण में साथी विधायिका को पटाने का ऑडियो वायरल हुआ ,पर सत्ता दबाब में इन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई }को भी पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। बस्‍ती में भी अपनी ही सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद हरीश द्विवेदी और भाजपा विधायक संजय जायसवाल और रवि सोनकर पुलिस के खिलाफ कोतवाली में धरने पर बैठ गए।                                                                                           भाजपा मामलों की जानकार पूजा सिंह का कहना है कि अटल-आडवाणी के दौर में कार्यकर्ताओं की सुनी जाती थी। कार्यकर्ताओं का सम्‍मान था, लेकिन अब शीर्ष नेतृत्‍व में अहंकार आ गया है। कार्यकर्ता अब उनके लिए सहयोगी नहीं बंधुआ जैसे हो गए हैं। इस स्थिति में उन्‍हीं के रहमोकरम पर चल रही योगी सरकार कार्यकर्ताओं के प्रति अहंकारी नजर आने लगी है। प्रत्‍येक मामले में कार्यकर्ताओं का पक्ष भले ही सही ना हो, लेकिन पुलिस की निरंकुश कार्यप्रणाली को लेकर कहीं किसी को संदेह नहीं है।

 

 

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