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मानव तस्करी-विरोधी बिल को मंजूरी दिलाने का राजनाथ सिंह ने दिया आश्वासन

केन्द्रिय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने आज राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साज्ञ मिलकर बाल श्रमिक नही ंके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मंच ‘‘पंेंसिल ‘‘ का शुभारंभ किया । इस अवसर पर 10 राज्यों के श्रम मंत्री भी उपस्थित थे।

‘‘पेंसिल‘‘ का शुभारंभ करते हुए केन्द्रिय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘‘ विश्व में कोई भी विकसित समाज बाल श्रम का अस्तित्व नहंीं रह सकता है, और यह दुःखद है कि स्वतंत्रता के बाद पिछले 70 वर्षों में भी हम इसे समाप्त नहीं कर पाए हैं । बाल श्रम और तस्करी मानवता के विरूद्ध गंभीर अपराध हैं तथा भारत सरकार सभी तरह की तस्करी को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्व मंच पर इस मामले का उठाने का श्रेय कैलाश सत्यार्थी को जाता है तथा मैं यह सुनिश्चत करता हूं कि आप जिस बिल के लिए लडाई कर रहे हैं, उस तस्करी-विरोधी बिल को संसद में शीघ्र ही पारित कर दिया जाएगा। ‘‘
गृह मंत्री के आश्वासन से पहले कैलाश सत्यार्थी ने बाल यौन शोषण, तस्करी और श्रम के बारे के बढते मामलों के बारे में कहा कि ‘‘ बच्चों से संबंधित मामलोें के लिए विशिष्ट न्यायालय होने चाहिए, यस मांग को हम भारत यात्रा के माध्यम से लगातार उठाते रहे हैं। पोेक्सो एक अच्छा कानून है , लेकिन इसका कार्यान्वयन और उसके बाद अपराध सिद्धि की स्थिति अत्यंत कमजोर है। बच्चो की सुरक्षा के लिए हमारा समग्र दृष्टिकोण होना चाहिए , इसीलिए मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वह यह सुनिश्चित करें कि जितनी जल्दी हो सके तस्करी बिल पास हो जाएगा ।‘‘
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार बाल तस्करी के खिलाफ दायर प्रकरणों की संख्या 3490 थी तथा प्रकरणों के पीडितों की संख्या 3905 थी। मानव तस्करी के कुल मामले 6877 थे और इन मामलों में पीडितांे की कुल संख्या 9127 थी।
कैलाश सत्यार्थी के प्रयासो को मान्य करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘‘ बाल यौन शोषण तथा तस्करी के बारे में जागरूकता बढाने के लिए कैलाश सत्यार्थी भारत यात्रा पर हैं । मैं उनसे इस यात्रा के माध्यम से पूरे देश ‘‘पेंसिल‘ के बारे मंे भी जागरूकता निर्मित करने का अनुरोध करता हूं।
उन्होने यह भी कहा कि ‘‘पूरी दुनिया में यह विश्वास फिर से दिलाने में कैलाश सत्यार्थी की भूमिक प्रमुख है कि भारत के पास बाल श्रम के खिलाफ तथा इस खतरे से जंग लडने की क्षमता है । इस कार्यक्रम में जिस तरह से सरकार ने हिस्सेदारी की है उससे मंे प्रोत्साहित हूं क्यांेकि इस तरह के दृष्टिकोण में ऊर्जा समाहित है। यदि 5 सालों में या इससे कम समय में भारत इस समस्या को सुलझा लेता है तो इस दृष्टिकोण के माध्यम से 1 करोड बाल श्रमिक को आजादी मिल सकेगी। ‘‘

बाल श्रमिक मुक्त भारत के निर्माण के लिए पेंसिल को आरंभ किया गया है। यह विधिक प्रावधानों तथा एनसीएलपी के प्रभावी क्रियान्वयन दोनो को लागू करने के लिए निर्बाध रूप से प्रक्रियाओं के एकीकृत कार्यान्वयन तथा मानिटरिंग को तेज करेगा।
दुनियाभर में भारत ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा बाल श्रमिक हैं। यह मंच नए बाल श्रम कानून के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पथ प्रशस्त करेगा तथा प्रवर्तन एजंेसियों का दायित्व भी सुनिश्चित करेगा। आज का राष्ट्रीय परामर्श एक ऐतिहासिक अवसर है जहां इन प्रयासों के प्रभावी सहयोग तथा संमिलन को सुनिश्चित करने के और भारत के लिए एक नई नीतिगत परिवर्तन के लिएहमंत्रालय और श्रम मंत्रालय एक साथ आएं हैं ।
इस अवसर पर अपनी भारत यात्रा से समय निकाल कर उपस्थित होने के लिए केन्द्रिय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कैलाश सत्यार्थी को धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होने भारत से बाल श्रम का उन्मुलन करने के मामले में अपनी सही प्रतिबद्धता प्रकट की है। उन्होने इस बात पर जोर दिया कि देश में बाल श्रम एक बढता हुआ खतरा है तथा श्रम मंत्रालय भविष्य मंे ठोस समाधान के साथ इस मामले को निपटाने की दिशा में कदम उठाएगा।
कन्याकुमारी से 11 सितम्बर को भारत में एक मजबूत बाल तस्करी बिल को तैयार कर लागू करने की आवश्यकता की मांग को लेकर भारत यात्रा आरंभ हुई है। गृह मंत्री की धोषणा से देश में बच्चों की सुरक्षा के लिए बलात्कार तथा तस्करी के खिलाफ जंग का फल मिलने की उम्मीद बढ गई है।
संसदीय समर्थन के अतिरिक्त यात्रा को शानदार विधिक समर्थन भी मिला है क्योंकि कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश माननीय सुभ्रो कमल मुखर्जी ने नोबल कैलाश सत्यार्थी को आश्वासन दिया है कि पोक्सो के मामले के शीध्र निपटान के मामलों को वह व्यक्तिगत रूप से देखेंगे। उन्होने यह भी आश्वासन दिया कि कनार्टक मे ज्यादा से ज्यादा बाल-हितैषी न्यायालयों का गठन किया जाएगा।
इस यात्रा को बच्चों के बलात्कार तथा बाल यौन शोषण के खिलाफ तीन साल के अभियान के रूप में आरंभ किया गया है जिसका लक्ष्य जागरूकता बढाना, ऐसे प्रकरणो की रिपोर्ट करना , चिकित्सीय स्वास्थ्य तथा मुआवजे सहित संस्थागत प्रतिक्रियाओं को मजबूत करना , सुनवाई के दौरान पीडितों और गवाहों की सुरक्षा एक समयबद्ध तरीके से बाल यौन शोषण के लिए अपराध सिद्धीको बढाना है।

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